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जब स्टेशन हाइटेक हुआ तो ट्रेनों का ठहराव नहीं

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13 : संग्रामपुर : क्षेत्र स्थित सहजीपुर हाल्ट रेलवे स्टेशन। -संवाद - फोटो : AMETHI
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संग्रामपुर (अमेठी)। लखनऊ-वाराणसी रेलवे ट्रैक पर स्थित सहजीपुर हाल्ट स्टेशन दिखने में भले ही काम का हो लेकिन यात्रियों के लिए यह महज नाम का ही है। ट्रैक पर संचालित होने वाली एक भी ट्रेन ऐसी नहीं जो इस इस हाल्ट पर रुकती हो। कोविड काल के पहले यहां चार जोड़ी ट्रेनों का ठहराव होता था। इससे प्रतिदिन करीब 150 यात्री यहां रुकने वाली अलग-अलग ट्रेनों से यात्रा करते थे। ट्रेन ठहराव नहीं होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रह है।
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संग्रामपुर के मिश्रौली रेलवे स्टेशन के आगे आसपास के कई गांवों के ग्रामीणों को सुविधा देने के लिए सहजीपुर हाल्ट बनाया गया था। सहजीपुर हाल्ट से ही अमेठी, प्रतापगढ़, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, बरेली, आदि स्थानों पर लोगों को कम रुपये में आने-जाने में सहूलियत मिलती थी। यात्रियों के लिए यह स्टेशन तब सुविधाजनक था जब यहां न उनके बैठने की व्यवस्था थी न ही पानी पीने की सुविधा। हाल्ट पर प्लेटफार्म भी नहीं बनाया गया था।
इससे ट्रेन में चढ़ने और उतरने में यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। बीते साल से ट्रेनों को गति देने के साथ ही यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए रेलवे विभाग ने अमेठी से अंतू तक रेल लाइन दोहरीकरण व विद्युतीकरण करने के बाद स्टेशनों को उच्चीकृत किया। सहजीपुर हाल्ट रेलवे स्टेशन भी सुविधाओं से लैस हो गया।
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यहां न सिर्फ नया भवन बनाया गया बल्कि दोनों तरफ प्लेटफॉर्म का भी निर्माण किया गया। यात्री प्रतीक्षालय, टिकट कक्ष, पेयजल के साथ छांव के लिए नियमानुसार छह टिन शेड का निर्माण किया गया है। प्रत्येक टिन शेड में चार बेंच लगाई गई हैं। हालांकि यात्रियों के लिए यह सारी व्यवस्था बेमानी साबित हो रही है। कोविड संक्रमण काल से बंद पैसेंजर ट्रेनों का संचालन बहाल नहीं होने से स्थानीय लोग ट्रेन यात्रा सुविधा से वंचित हो रहे हैं।
ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से लोगों को यात्रा के लिए निजी वाहनों को सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। बीते कई महीनों से स्थानीय लोगों द्वारा पैसेंजर ट्रेनों का संचालन पुन: शुरू कराए जाने की मांग की जा रही है लेकिन रेलवे इन्हें बहाल नहीं कर रहा। (संवाद)
इन ट्रेनों को होता था संचालन
कोविड काल से पहले सहजीपुर हाल्ट पर अप/डाउन लखनऊ-प्रयाग पैसेंजर, वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर, प्रतापगढ़-लखनऊ शटल पैसेंजर, तथा लखनऊ-प्रतापगढ़ डेमू पैसेंजर का ठहराव होता था। सभी ट्रेनों पर प्रतिदिन लोग अमेठी, प्रतापगढ़, गौरीगंज, रायबरेली, लखनऊ लोग जाते थे। वही पूर्णिमा व माघ मेले में पीआरएल से बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज की यात्रा करते थे।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
रसिक बिहारी तिवारी ने कहा कि पहले सहजीपुर हाल्ट पर कोई सुविधा नहीं थी। अब मूलभूत सभी सुविधाएं हो गईं। लेकिन बिना ट्रेन ठहराव के सुविधाओं का कोई मतलब नहीं निकल रहा। सरकार अब यहां बंद हुई पैसेंजर ट्रेनों का संचालन जल्द कराए। दिलशाद खान ने बताया कि सहजीपुर हाल्ट पर ट्रेन का ठहराव नहीं होने से विकास बाधित हो रहा है। आसपास के करीब 30 गांवों के लोगों को यात्रा करने में असुविधा हो रही है।
विभाग को ट्रैक पर बंद पड़ी ट्रेनों का संचालन बहाल करना चाहिए। नान्हू ने कहा कि हाल्ट पर ट्रेन का ठहराव नहीं होने से सुविधा से लैस स्टेशन लोगों के किसी काम का नहीं है। अगर पैसेंजर ट्रेनों का संचालन बहाल नहीं होता तब तक विभाग को अन्य कुछ ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित करते हुए सुविधा देनी चाहिए। जिससे लोगों को यात्रा करने में परेशानी न उठानी पड़े। राकेश कुमार मौर्य ने कहा कि सहजीपुर में ट्रेन का ठहराव नहीं होने से अमेठी या अंतू स्टेशन जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है। अगर पैसेंजर ट्रेनें चल जाए तो किसानों के साथ आसपास के लोगों को इस सुविधा संपन्न हाल्ट का लाभ मिले। आसपास की करीब 30 हजार आबादी को सहूलियत मिले।
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