बाजारशुकुल (अमेठी)। वर्तमान समाज में मानव साधना में नहीं, अपितु साधन में विश्वास रखता है। मगर यह सत्य है कि भगवान के भजन के बिना जीव का कल्याण नहीं हो सकता है। भगवान के भजन से ही कल्याण होगा। ये बातें क्षेत्र के भटमऊ गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन मंगलवार को प्रवाचक आचार्य विपिन नंदन शुक्ला महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि जीव वह है जो जगत को देखता है। जगत वहां है जिसे जीव भोगता है और उसका लाभ उठाता है। जीव और जगत जिससे पैदा होते हैं, वह ब्रह्म है। यदि जीव हो और जगत न हो तो दुख कैसे उत्पन्न होगा, इसलिए प्रभु ने जगत बनाया है, ताकि जीव का निर्वाह होता रहे। परंतु इस वास्तविकता को जीव भूल जाता है और जगत की ओर इतना आकर्षित हो जाता है कि अपने प्रभु को ही भूल जाता है। यहीं से जीव के दुखों का प्रारंभ होता है।
प्रवाचक ने कहा कि प्रभु से विमुख होकर इस दुनिया में कोई चैन नहीं पा सकता, इसलिए मानव भी उस प्रभु को जानने का प्रयास करें। क्योंकि जब वह उसे जान लेगा तो सुख ही पाएगा। यदि नहीं जानेगा तो दुखी ही रहेगा। इस अवसर पर बृज किशोर मिश्रा, आनंद पांडेय, बृजेंद्र मिश्रा, डॉ. मोनू, राम प्रवेश तिवारी आदि मौजूद रहे।