बाजारशुकुल (अमेठी)। रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को जीवन की सीख देता है। रामायण के हर एक चरित्र से कुछ न कुछ शिक्षा अवश्य प्राप्त होती है। यदि व्यक्ति रामायण को पूजने के साथ उससे मिलने वाली सीख का अपने जीवन में अनुसरण करे तो वह एक सफल जीवन व्यतीत कर सकता है। ये बातें क्षेत्र के पारा गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन प्रवाचिका देवी राधिके ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि रामायण में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण तीनों ने ही 14 वर्षों तक विपरीत परिस्थितियों में भी संयम के साथ समय व्यतीत किया। रामायण की इस बात से सीख मिलती है कि व्यक्ति को हर परिस्थिति में संयम बनाए रखना चाहिए। जो व्यक्ति सुख एवं दुख में संयम और धैर्य बनाए रखता है, वह विषम परिस्थितियों से लड़कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
प्रवाचिका ने कहा कि परिवार में सदैव एकता रखनी चाहिए। भाई यदि भाई के साथ हो तो विषम परिस्थितियों को भी आसानी से पार किया जा सकता है। इसलिए परिवार में प्रेम और एकता बनाए रखना चाहिए। कहा कि सत्संग दुर्भाग्य की रेखाओं को सौभाग्य में बदल देता है। जहां भक्त प्रभु का गुणगान करते हैं, वहीं प्रभु का निवास होता है। इस मौके पर ओमकृष्ण तिवारी, शिवांशु मिश्रा, विमलेश तिवारी, अतुल तिवारी, सुभाष तिवारी, मनोज, सोनू आदि मौजूद रहे।