अमेठी। मानव शरीर भगवान की भक्ति के लिए मिला है। कष्ट सहकर उनकी आराधना करनी चाहिए। यह शरीर भौतिक संसाधनों के सुख भोगने के लिए नहीं है। बगैर भगवान की कृपा के कल्याण संभव नहीं है। ये बातें ब्लॉक अमेठी के परशुरामपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन प्रवाचक भागवत भूषण आचार्य संतोष महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि परमपिता परमेश्वर की निष्काम भाव से भक्ति करने वाले भक्तों का हमेशा कल्याण होता है। वह अपने जन्म और मरण दोनों को सार्थक बना लेते हैं। भक्त प्रह्लाद ने निष्काम भाव से भक्ति कर परमपिता परमेश्वर के साक्षात दर्शन कर उनकी कृपा प्राप्त की। हिरण्यकश्यप की कथा में बताया कि अहम ब्रह्मास्मि की स्थिति प्राप्त करना आसान नहीं, लेकिन हिरण्यकश्यप वरदान प्राप्त करने के बाद खुद को भगवान मानने लगा। क्योंकि जब विनाश आता है तो विवेक मर जाता है।
प्रवाचक ने कृष्ण जन्मोत्सव की कथा का विस्तार से वर्णन किया। बताया कि लोग भगवान कृष्ण जैसा बालक चाहते हैं तो वासुदेव-देवकी सा कष्ट भी सहना पड़ता है, तपस्या करनी पड़ती है। इस मौके पर भाजपा के जिलाध्यक्ष रामप्रसाद मिश्र, सह विभाग प्रचारक ओम प्रकाश, भवानी प्रसाद दीक्षित, सतीश शुक्ल, सुधांशु शुक्ल, देव प्रकाश पांडेय, दिनेश सिंह, कैलाश नाथ तिवारी, दिनेश शुक्ल, गाड मिश्रा, शिवमूर्ति तिवारी, मोहन पांडेय, रामचंद्र मिश्रा, लाल जी तिवारी, बिंद्रा प्रसाद तिवारी, रामराज यादव आदि मौजूद रहे।