संग्रामपुर। दिसंबर में ठंड के साथ कोहरा और बादल छाए रहने के कारण गांवों में पेयजल संकट खड़ा हो गया है। सोलर पैनल से चलने वाली पानी की टंकियों से जलापूर्ति बाधित हो गई है। धूप न निकलने से सोलर सिस्टम काम नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से जरौटा, तारापुर, उत्तरगांव, गूजीपुर, कसारा, भौसिंहपुर, बड़गांव समेत अन्य गांवों में तीन दिनों से नलों में पानी नहीं आ रहा है। जरौटा गांव में पानी की टंकी बनी है, मगर सौर ऊर्जा सिस्टम बंद होने से आपूर्ति ठप है।
ग्रामीणों का कहना है कि टंकी के लिए न बिजली कनेक्शन कराया गया और न ही जेनरेटर चलाने के लिए डीजल की व्यवस्था है। ऐसे में टंकी होने के बावजूद लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। महिलाएं दूर स्थित हैंडपंपों से पानी भरने को मजबूर हैं। उत्तरगांव में भी हालात बिगड़े हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार ठंड बढ़ते ही घर-घर नल से जल योजना प्रभावित हो गई। तीन दिनों से नलों से पानी नहीं आया है। सुबह और शाम पानी आने की उम्मीद रहती है, लेकिन आपूर्ति पूरी तरह बंद है। इससे घरेलू कामकाज के साथ पशुओं के लिए पानी जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
तारापुर गांव में भी टंकी से जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। ग्राम प्रधान ने बताया कि सौर ऊर्जा और जेनरेटर की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन कोहरे और बादलों में सोलर सिस्टम काम नहीं कर रहा है। जेनरेटर से पानी चलाने के लिए डीजल की नियमित व्यवस्था नहीं हो पा रही है, जिससे दिक्कत बनी हुई है। गूजीपुर, कसारा, भौसिंहपुर और बड़गांव गांवों में भी पानी की स्थिति खराब है। ग्रामीणों का कहना है कि तीन दिन से पानी न मिलने के कारण रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।
जल निगम के अवर अभियंता नीरज प्रजापति ने बताया कि कोहरा और बादल रहने से सोलर सिस्टम प्रभावित हुआ है। कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए हैं कि ठंड के मौसम में जेनरेटर के सहारे तय समय पर जलापूर्ति चालू रखी जाए। ग्रामीणों ने मांग की है कि मौसम साफ होने तक वैकल्पिक व्यवस्था से नियमित पानी की आपूर्ति की जाए।