बारामासी अंडरपास में भरे पानी से गुजरता बाइक सवार। संवाद
अमेठी सिटी। लखनऊ-वाराणसी रेल खंड पर अमेठी के बारामासी क्रॉसिंग पर बने अंडरपास में तीन माह से पानी भरा हुआ है। इसकी वजह से 50 गांवों के लगभग एक लाख लोगों को परेशानी हो रही है। अंडरपास में नहर के पानी का रिसाव हो रहा है। राहगीर व स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर रेल ट्रैक पार कर आवागमन करने को मजबूर हैं।
क्षेत्र के करीब 50 गांवों के लोग बीते डेढ़ दशक से लखनऊ-वाराणसी रेल खंड स्थित अमेठी के बंद बारामासी रेलवे क्राॅसिंग पर अंडरपास के निर्माण का इंतजार कर रहे थे। अक्तूबर 2024 में अंडरपास के निर्माण की कवायद शुरू हुई। इस समय अंडरपास का निर्माण तकरीबन हो गया है। इसमें शेड सहित अन्य कुछ कार्य अभी होने बाकी हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार दो से तीन माह हो गए, कार्यदायी संस्था ने काम बंद कर रखा है।
इस अंडरपास के करीब एक इंटर कॉलेज और प्राथमिक विद्यालय है। इसके अलावा दो अन्य विद्यालय के साथ बारामासी बड़ी बाजार है। प्रतिदिन 20 हजार से ज्यादा लोग यहां से गुजरते हैं। इस समय हालात यह हैं कि बारिश नहीं होने के बावजूद अंडरपास में पानी भरा हुआ है। बाइक व चार पहिया वाहन किसी तरह निकल रहे हैं। स्कूली बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर रेल ट्रैक पार कर आवागमन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसको लेकर लोगों में आक्रोश है।
कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर शिवाकांत ने बताया कि ठेकेदार के पास मजदूर नहीं होने से काम बंद था। दो दिन में कार्य शुरू हो जाएगा। नवंबर में कार्य पूरा कर लिया जाएगा। अंडरपास में डाले गए बॉक्स में केमिकल भरवाकर पानी का रिसाव बंद करा दिया जाएगा।
ग्रामीण बोले, अंडरपास परेशानी का कारण
स्थानीय निवासी धर्मेंद्र शुक्ल ने बताया कि अंडरपास का निर्माण तीन माह से बंद है। स्कूली बच्चे व राहगीर अपनी जान जोखिम में डालकर रेल ट्रैक पार करने को मजबूर हैं। शिक्षक हरिमंगल शुक्ल ने बताया कि अंडरपास निर्माण में कार्यदायी संस्था लापरवाह बनी हुई है। बुजुर्ग गौरीशंकर मिश्र ने बताया कि हम लोगों के लिए यही एक रास्ता है। काम अधूरा पड़ा हु़आ है। राम खेलावन ने बताया कि आवागमन में समस्या है। ट्रैक पार कर आवागमन में हादसे का खतरा रहता है।
शिक्षकों की लगती है ड्यूटी
रेल ट्रैक के पास दो परिषदीय विद्यालय हैं। सुबह स्कूल आने और जाने के समय दो शिक्षक रेल ट्रैक के पास मौजूद रहते हैं। मौके पर मिले शिक्षक अजय कुमार ने बताया कि अंडरपास में पानी भरा होने से छात्र-छात्राएं रेल ट्रैक पार कर आते-जाते हैं। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां पर खड़े होना पड़ता है। वहीं अभिभावक राजेश कुमार, राजेंद्र कुमार आदि अपने बच्चों को रेल ट्रैक पार कराते मिले।