अमेठी सिटी। जिला बने डेढ़ दशक से अधिक बीत जाने के बाद भी दीवानी अदालत नहीं मिल सकी है। भूमि, बंटवारा, उत्तराधिकार, वसीयत और संपत्ति संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए वादकारियों को आज भी दूसरे जिलों की अदालतों का रुख करना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस पर यह स्थिति न्याय तक आसान पहुंच के दावे पर सवाल खड़े करती है।
वर्तमान में अमेठी, गौरीगंज और मुसाफिरखाना तहसील के दीवानी वाद सुल्तानपुर में, जबकि तिलोई तहसील के मामलों की सुनवाई रायबरेली में होती है। हर पेशी पर वादकारियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार सुनवाई स्थगित होने पर पूरा दिन अगली तारीख लेने में ही निकल जाता है।
इसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों, महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले वादकारियों पर पड़ता है। यात्रा, अधिवक्ता और अन्य खर्च मिलाकर मुकदमे की लागत भी बढ़ जाती है। ग्राम न्यायालय तो संचालित हैं लेकिन वह भी उधारी के भवन में न्याय देने की कोशिश पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा न्यायालय परिसर
कलेक्ट्रेट परिसर के निकट 220 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक दीवानी न्यायालय परिसर का निर्माण कराया जा रहा है। शासन पहली किस्त के रूप में 55 करोड़ रुपये जारी कर चुका है और अप्रैल 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परिसर में जिला जज सहित 17 अदालतों के अलावा अधिवक्ताओं के चेंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास, अभिलेख कक्ष, प्रतीक्षालय, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।