मुसाफिरखाना। करीब 35 वर्षों से चल रहे भूमि नामांतरण विवाद में आखिरकार फैसला आ गया है। लंबे समय तक विभिन्न अपीलों, आपत्तियों और प्रमाण-पत्रों के आधार पर चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने वाददायरा प्रार्थना पत्र को निरस्त करते हुए वर्ष 1990 में पारित आदेश को बहाल कर दिया है। न्यायालय ने अपने निर्णय में वसीयतनामा, प्रमाणपत्रों और गवाहियों का अवलोकन कर यह माना कि प्रस्तुत दावा तथ्यहीन और अविश्वसनीय है।
पूरे प्रसाद तिवारी मजरे निसूरा निवासी राम प्रकाश की बहू विद्यावती की पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने बताया कि तहसीलदार राहुल सिंह के न्यायालय में चल रहे भूमि नामांतरण विवाद में न्यायालय ने अंतिम रूप से निर्णय दिया है। वाददायरा प्रार्थना पत्र (दिनांक 09 मार्च 1998) को निरस्त कर दिया है। यह प्रकरण बैजनाथ सुत जगपाल के नामांतरण आदेश दिनांक 15 जून 1990 के विरुद्ध प्रस्तुत प्रार्थना पत्र से संबंधित था। न्यायालय में प्रस्तुत प्रमाणों और गवाहियों से यह स्थापित हुआ कि प्रश्नगत वसीयत संदेहास्पद है और वाद में प्रस्तुत दस्तावेजों में विसंगतियां हैं। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने माना कि वाददायरा प्रार्थना पत्र निरस्त होने योग्य है और मृतक बैजनाथ की वरासत के नामांतरण से संबंधित आदेश दिनांक 15 जून 1990 सही और प्रभावी है।