मौसम की मार से किसान उबर नहीं पा रहे हैं। एक तरफ सीजन भर बारिश न होने से जहां धान की फसल बर्बाद हो गई। वहीं अब सितंबर माह की शुरुआत से बीच-बीच हो रही बारिश सब्जियों की फसल हो नुकसान पहुंचा रही है। बीते चार दिनों से हो रही बारिश से तिलहनी और सब्जी की फसलों को भारी नुकसान का अंदेशा है।
सोमवार से जिले में रुक-रुक कर बरसात हो रही है। अब तक बारिश न होने से किसान धान की फसल को लेकर चिंतित थे। चार दिनों से हो रही बारिश धान की फसल के लिए वरदान साबित होगी। लेकिन वो किसान जिन्होंने तिलहनी और सब्जी की फसलें उगाई हैं ये बारिश उन फसलों को खास नुकसान पहुंचा रही है।
सब्जियों की फसल खराब होने से किसानों को दोबारा से बोआई करनी पड़ेगी। इससे उनकी लागत का खर्च बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर ग्राहकों पर भी पड़ेगा। समय से बाजार में कम आवक और ज्यादा डिमांड के चलते सब्जी का भाव भी बढ़ सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र कठौरा के अध्यक्ष व कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरके आनंद ने बताया कि अभी तक जितनी बारिश हुई है वह धान की फसल के लिए फायदेमंद होगी। जहां धान की फसल में फली और फूल आ गए हैं उन्हें थोड़ा नुकसान होगा।
सब्जी की इन फसलों पर असर
यदि ज्यादा बारिश होती है तो उरद, मूंग, तिल, सांवा, कोदौ और सब्जी में अगेती आलू, मटर, टमाटर, तोरिया, लौकी, कद्दू, पालक, सोया, मेथी, गाजर, मूली, शलजम, फूल गोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, धनिया, करेला, बैगन आदि फसलों का नुकसान होना तय है। बीते चार दिनों की बारिश में जिले में तिल, कद्दू आदि की फसल को नुकसान पहुंचा है।
ऐसे करें बचाव
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद्र कुमार ने बताया कि किसान सब्जियों, तिल तथा अरहर के खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें तथा लंबी अवधि की धान की प्रजातियों वाले खेत में मेड़ों को मजबूत करें। जिससे बारिश का पानी ज्यादा दिन तक खेत में संरक्षित रह सके।, इससे फसल में काफी दिनों तक सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। वैज्ञानिक कृषि डॉ. देवेश पाठक ने सुझाव दिया कि यदि अभी तक धान में यूरिया की दूसरी मात्रा का प्रयोग नहीं किया है तो तत्काल इसका प्रयोग करें।
पशुओं का भीगने से बचाएं
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र सिंह ने बताया कि ऐसे मौसम में पशुओं को बारिश से भीगने से जरूर बचाएं क्योंकि ऐसी स्थिति में उनको बुखार होने की संभावना रहती है। हरा चारा काटने के बाद कुछ देर किसी सहारे से सीधा खड़ा करके रख दें जिससे पत्तियों पर लगा पानी सूख जाए उसके बाद ही पशुओं को खिलाएं।
18 तक बादल छाए रहने की संभावना
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम वैज्ञानिक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि बुधवार को हवा की गति 9.7 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दक्षिणी-पूर्वी चलकर 33.2 मिली मीटर रिकॉर्ड की गई। बताया कि 18 सितंबर तक घने बादल छाए रहने की संभावना है। 16 सितंबर को 10 से 15 मिमी, 17 को 20 से 25 मिमी और 18 सितंबर को 10 से 15 मिली मीटर वर्षा होने की संभावना है। सप्ताह भर औसत तापमान सामान्य से कम रहने एवं हवा सामान्य व सामान्य से तेज गति से पूर्वी चलने के आसार हैं।