परिजनों में छाया मातम।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
शहनाई से पहले उठीं सिसकियां, नम आंखों से हुई बेटी की विदाई
जिस घर में शहनाई गूंजने और खुशियों के गीत सुनाई देने थे, वहां अचानक चीख-पुकार और सिसकियों का माहौल बन गया। शुक्रवार रात बेटी की शादी के लिए फल और सामान लेने निकले पिता गौतम और रिश्तेदार आसाराम की सड़क हादसे में मौत की खबर पहुंचते ही पूरा परिवार टूट गया।
कुछ देर पहले तक जहां रिश्तेदार हंसी-खुशी शादी की तैयारियों में जुटे थे, वहां मातम पसर गया। मुबारकपुर मजरे पूरे अमृतलाल पंडित का पुरवा निवासी गौतम अपनी बेटी मनीषा की शादी को लेकर बेहद उत्साहित थे।
घर में मेहमानों की आवाजाही लगी थी। महिलाएं मंगलगीत गा रही थीं। दरवाजे पर टेंट सज चुका था और बरात के स्वागत की तैयारियां चल रही थीं। गौतम रिश्तेदार आसाराम के साथ बाइक से शादी के लिए फल और अन्य सामान लेने जगदीशपुर गए थे।लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर हादसे की सूचना गांव पहुंची तो खुशियों से भरा घर अचानक मातम में डूब गया।
सजावट के बीच गूंजती सिसकियां
पिता की मौत की खबर सुनते ही दुल्हन बनी मनीषा बेसुध होकर गिर पड़ी। मां बदहवास होकर रोने लगी। घर में मौजूद महिलाएं और रिश्तेदार एक-दूसरे को संभालते नजर आए। दरवाजे पर लगी झालरें और सजावट के बीच गूंजती सिसकियां हर किसी को भावुक कर रही थीं।
गांव के लोग और रिश्तेदार देर रात तक परिवार को ढांढस बंधाते रहे। काफी देर तक इस बात पर चर्चा होती रही कि शादी टाली जाए या रस्में पूरी कराई जाएं। आखिरकार सामाजिक परंपरा और परिस्थितियों को देखते हुए गमगीन माहौल में वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न कराने का निर्णय लिया गया।
रात में बरात तय समय पर पहुंची, लेकिन न बैंड बजे और न ही आतिशबाजी हुई। द्वारचार और अन्य रस्में भारी मन से पूरी कराई गईं। शादी के मंडप में मंत्रों की आवाज के बीच परिजनों की सिसकियां सुनाई देती रहीं। विदाई के समय माहौल और भी भावुक हो गया।
पिता की तस्वीर से लिपटकर रोती मनीषा को देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। गांव की महिलाओं ने किसी तरह उसे संभाला और नम आंखों से विदा किया। जिस घर में पूरी रात खुशियां और गीत गूंजने थे, वहां देर रात तक मातम और सिसकियों का माहौल बना रहा।