अमेठी। अमेठी-गौरीगंज मार्ग स्थित खजुरी गांव के पास बृहस्पतिवार की दोपहर एक तेज रफ्तार कार सड़क किनारे गुमटी को तोड़ते हुए गड्ढे में पलट गई। कार सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। जहां पर कार सवार टेंट व्यवसायी की मौत हो गई, दूसरे की हालत नाजुक देखकर चिकित्सकों ने लखनऊ ट्राॅमा सेंटर रेफर कर दिया।
गौरीगंज थानाक्षेत्र के गांव पांडेय का पुरवा मजरे टिकरिया गांव निवासी आयुष पाल (22) गांव में टेंट की दुकान चलाता है। इसके साथ पढ़ाई भी करता है। बृहस्पतिवार दोपहर आयुष गौरीगंज थाना क्षेत्र के गांव बाबूपुर निवासी प्रद्युमन सिंह के साथ कार से अमेठी जा रहा था।
अमेठी गौरीगंज मार्ग पर खजुरी गांव स्थित चौराहे के पास मोड़ होने से तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर गुमटी से टकराकर सड़क किनारे गड्ढे में कई बार पलटा खाकर गिर गई। घटना में सवार आयुष और प्रद्युमन कार के अंदर ही फंस गए। मौके पर पहुंचे लोगों ने मामले की सूचना पुलिस को देते हुए कड़ी मशक्कत के बाद गंभीर रूप से घायल दोनों को कार से बाहर निकाला। कार से बाहर निकालने के बाद दोनों को आनन-फानन में जिला अस्पताल पहुंचाया।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने आयुष को मृत घोषित कर दिया। इसके साथ ही प्रद्युमन सिंह की हालात नाजुक देख ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। एसएचओ गौरीगंज शिवाकांत तिवारी ने बताया कि घटना स्थल अमेठी कोतवाली है। अस्पताल के मेमो के आधार पर पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई की जा रही है। प्रभारी निरीक्षक अमेठी कृष्ण मोहन सिंह ने बताया कि आयुष पाल की मृत्यु हो गई है और प्रद्युमन सिंह गंभीर है।
यह क्या हो गया....
- खजुरी गांव के पास हुए हादसे की खबर के बाद मौके पर भारी भीड़ एकत्र हो गई। स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। टिकरिया व बाबूपुर गांव में जिसे सूचना मिली वह भागते हुए जिला अस्पताल पहुंचा। हर कोई इस घटना से गुमसुम था। पूर्व प्रधान श्रीराम यादव का कहना था कि यह क्या हो गया है, बहुत ही दुखद घटना है।
बुझ गया घर का चिराग, छिन गया सहारा
- मृतक आयुष पाल अपने परिवार का एकलौता सहारा था। परिवार का भरण पोषण करता था। मृतक आयुष के पिता दिनेश पाल की भी तीन वर्ष पूर्व अमेठी-गौरीगंज मार्ग स्थित पूरे प्रेम गांव के समीप सड़क दुर्घटना मौत हो गई थी। अभी पिता की मृत्यु से परिवार उबर नहीं पाया था कि घर का एकलौता चिराग बुझ गया। घर में छोटी बहन कीर्ति और मां संगीता का रो-रो कर बुरा हाल है। गांव में मातम पसरा हुआ है। हर किसी की आंखें नम थीं।