अमेठी सिटी। बाल विकास व पुष्टाहार विभाग की ओर से गर्भवती, धात्री महिलाओं व छोटे बच्चों को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराने के लिए पोषाहार की व्यवस्था की गई है। सितंबर माह से अभी तक कुल चार महीने से जिले में पोषाहार का वितरण नहीं किया गया है। इससे करीब दो लाख से अधिक लाभार्थी प्रभावित हैं।
बाल विकास विभाग की ओर से जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन से छह साल तक के बच्चों को विद्यालय से पहले की पढ़ाई कराई जा रही है। क्षेत्र की गर्भवती, धात्री, किशोरी व बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी का कार्य भी आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है।
आंगनबाड़ी परिसर में सप्ताह में दो बार टीकाकरण का आयोजन किया जाता है। इसी के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती व धात्री महिलाओं के साथ बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए भी शिविर लगाया जाता है। इसी क्रम में बच्चों व महिलाओं को उचित पोषण देने के लिए पोषाहार की व्यवस्था भी की गई है। फिलहाल चार माह से पोषाहार का संकट पैदा हो गया है। जिससे लाभार्थियों पर स्वास्थ्य दुष्प्रभाव भी हो सकता है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि नेफेड के माध्यम से बच्चों, गर्भवती, धात्री महिलाओं के लिए पोषाहार की व्यवस्था की गई है। सितंबर माह से अभी तक जिले में पोषाहार की आपूर्ति नहीं नहीं हुई। इसलिए वितरण भी नहीं हो सका है।
पोषाहार में मिलता है दाल, दलिया व तेल
बाल विकास व पुष्टाहार विभाग की ओर से लाभार्थियों को दाल, दलिया व तेल देने की व्यवस्था की गई है। नेफेड संस्था के माध्यम से गर्भवती व धात्री महिलाएं, तीन से छह साल के बच्चों को गेहूं की दलिया, चना दाल व फोर्टीफाइड तेल का वितरण अलग-अलग मात्रा में किया जाता है। जिसके नियमित सेवन से बच्चों का पोषण स्तर बेहतर होता है, उनका स्वास्थ्य अच्छा होता है।
जिले में कुल 205886 लाभार्थी
अमेठी जिले में 1049 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार पाने वाले कुल लाभार्थियों की संख्या 2,05,886 है। इसमें पंजीकृत बच्चों की संख्या 1,81,716 है। गर्भवती महिलाओं की संख्या 13,925 व धात्री महिलाओं की संख्या 10,245 है। जिनके लिए पोषाहार की व्यवस्था की जाती है।
पोषाहार नहीं मिलने से बढ़ सकता है कुपोषण
छोटे बच्चों व महिलाओं को जरूरत के अनुसार पोषाहार दिया जाता है। पोषाहार समय से नहीं वितरित करने पर कुपोषण की समस्या हो सकती है। गर्भवती व धात्री महिलाओं व बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव हो सकते हैं। वहीं पोषाहार समय से खिलाने पर बच्चों को विभिन्न प्रकार से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।
-डॉ. राम प्रसाद, एसीएमओ, अमेठी