सिंहपुर (अमेठी)। पूरे बख्तावर मजरे पेंडारा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को प्रवाचक अखिलेश्वरानंद ने बताया कि ईश्वर के प्रति सच्ची भक्ति ही मोक्ष का मार्ग है। श्रीमद्भागवत कथा में सृष्टि की उत्पत्ति, ब्रह्माजी की उत्पत्ति और उनकी स्तुति का वर्णन किया गया है।
प्रवाचक ने कहा कि यह दिन खासतौर पर सृष्टि के प्रारंभिक रहस्यों को उजागर करता है। भगवान श्रीहरि ने सबसे पहले ब्रह्माजी को सृष्टि रचने का कार्य सौंपा। उन्होंने चारों वेदों, समय, दिशा, काल और जीवों की रचना की। नारद जी का जन्म और उनका चरित्र भी वर्णित किया गया। नारद जी ने बाल्यकाल में भक्ति मार्ग अपनाया और भगवान नारायण की सेवा में लीन हो गए।
उन्होंने सात्विक जीवन अपनाकर तपस्या की, जिससे उन्हें अगले जन्म में भगवान के पार्षद का स्थान प्राप्त हुआ। प्रवाचक ने कहा कि चाहे कोई भी परिस्थिति हो, यदि व्यक्ति का मन भगवान में लग जाए तो वह भवसागर से पार हो जाता है। कथा में यह भी बताया गया है कि कैसे जीव अज्ञानवश माया में फंसा रहता है और भगवान की कृपा से ही वह उस बंधन से मुक्त हो सकता है। ब्रह्माजी की तपस्या और नारदजी की भक्ति इसके उदाहरण हैं। इस दौरान मुख्य यजमान राम बरन साहू, आयोजक वासुदेव सिंह, जन्मेजय सिंह, गौरी शंकर साहू, अनिरुद्ध सिंह आदि मौजूद रहे।