अमेठी सिटी। संग्रामपुर क्षेत्र के ठेंगहा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन प्रवाचक श्याम शंकर मिश्र ने गोवर्धन पूजा, छप्पन भोग, रासलीला और रुक्मिणी विवाह के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
प्रवाचक ने रास पंच अध्याय का महत्व बताते हुए कहा कि इनमें गाए गए पंच गीत भागवत के प्राण हैं। इनका भावपूर्वक गायन करने वाला व्यक्ति मोक्ष का अधिकारी बनता है। कहा कि श्रीकृष्ण की बांसुरी की धुन पर गोपियों का सम्मिलन, जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। प्रवाचक ने कहा कि सच्चे भाव से ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। प्रभु की कृपा से ही भवसागर से मुक्ति मिलती है।
प्रवाचक ने भगवत कथा को ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का स्रोत बताया। कथा स्थल की भूमि को पवित्र बताते हुए कहा कि जहां भगवान की लीला होती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा स्वतः प्रस्फुटित होती है। माखन चोरी और ऊखल बंधन जैसी लीलाओं के माध्यम से भगवान के प्रेम स्वरूप को दर्शाया गया। इस मौके पर शांति देवी, शिवकुमार मिश्र, विजय मिश्र, पवन मिश्र, कुशमेश मिश्र, मनोज मिश्र आदि मौजूद रहे।