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Amethi News: कछुआ तस्करी के लिए सबसे मुफीद माध्यम बनी ट्रेन

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जगदीशपुर (संवाद)। प्रतिबंधित कछुओं की तस्करी के लिए ट्रेन सबसे मुफीद माध्यम बन गई है। चार साल में चार बार तस्करों के चंगुल से कछुए छुड़ाए जा चुके हैं। मंगलवार को मुसाफिरखाना स्टेशन के पास पकड़ी गई महिला ने भी पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां पुलिस को दी हैं। बताया कि आसपास के जिलों के बदमाश इस तस्करी में शामिल हैं।
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मुसाफिरखाना रेलवे स्टेशन के पास मंगलवार को तीन बैगों में प्रतिबंधित प्रजाति के 80 कछुओं के साथ जगदीशपुर के गांधीनगर की लालती को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में सामने आया कि लालती कछुआ तस्करी गिरोह की सक्रिय सदस्य है। यह गिरोह अमेठी, रायबरेली, बाराबंकी, सुल्तानपुर और अयोध्या के गांवों व तालाबों से कछुए एकत्र करता है। पकड़े जाने से बचने के लिए गिरोह के सदस्य कछुओं को अलग-अलग ट्रेनों, कोचों और स्टेशनों से कोलकाता भेजते हैं, जहां इनकी ठीकठाक कीमत मिलती है। इंस्पेक्टर विवेक सिंह ने बताया कि गिरफ्तार महिला से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर ली गई है। जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
आठ साल पहले बरामद किए थे नौ हजार कछुए
पुलिस की जानकारी में आया है कि जगदीशपुर के पालपुर क्षेत्र में कंजड़ बिरादरी के लोग इस अवैध कारोबार में लंबे समय से शामिल हैं। गिरोह में करीब 20 पुरुष और महिलाएं सक्रिय हैं। ये लोग तस्करी से जुड़े मामलों में पहले भी जेल जा चुके हैं, लेकिन जमानत पर छूटने के बाद फिर से इसी कामत में लग जाते हैं। वर्ष 2017 में एसटीएफ ने इसी क्षेत्र से नौ हजार कछुए बरामद किए थे। तब भी गिरोह का नेटवर्क सामने आया था, लेकिन शीर्ष पर बैठे सरगना अब तक कानून की गिरफ्त से दूर हैं। पुलिस के मुताबिक तस्करों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत केस दर्ज किया गया है।
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पूर्व में सामने आए मामले
एक नवंबर 2023: जायस तिराहे से तीन तस्कर 1167 कछुओं के साथ गिरफ्तार। कछुओं की अनुमानित कीमत 25 लाख रुपये।
सात जनवरी 2024: निहालगढ़ स्टेशन के पास गांधीनगर निवासी सुल्तान 82 कछुओं के साथ पकड़ा गया।
आठ अगस्त 2024: अमेठी स्टेशन से दो महिलाओं समेत पांच तस्कर 79 कछुओं के साथ पकड़े गए।
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