जिला अस्पताल की ओपीडी में मौजूद मरीज। संवाद
अमेठी सिटी। भीषण गर्मी और तापमान में बढ़ोतरी के बीच अब गले और कान के संक्रमण के मरीजों की संख्या में इजाफा हो गया है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस मौसमी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के ईएनटी विभाग में रोजाना 25 से 30 मरीज परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। डाॅक्टर का कहना है कि यह संक्रमण मामूली नहीं है। समय रहते इलाज न होने पर यह जानलेवा भी बन सकता है।
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संदीप कुमार के अनुसार, बच्चों में टांसिल में सूजन, गले में खराश, बुखार जैसे लक्षण मिल रहे हैं, तो वहीं बड़ों में ओटाइटिस मीडिया एक्यूट व ओटोमाइकोसिस की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में कान का पर्दा फटने की भी स्थिति बन रही है, जिससे बहरापन हो सकता है।
गर्म मौसम में बाहर से अचानक आकर ठंडा पानी पीना, आइसक्रीम खाना या फिर तेज एसी की हवा में बैठना गले और कान की समस्याओं का कारण बन सकता है। डॉ. संदीप के मुताबिक, बच्चों में टांसिल के संक्रमण से सांस नली तक प्रभावित हो रही है और समय पर इलाज न हो तो स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। वहीं, बुजुर्गों और वयस्कों में फंगल संक्रमण से कान बहना और दर्द प्रमुख लक्षण हैं।
सावधानी संग दवा का नियमित सेवन करें
डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि यह समस्या नाक में अत्यधिक सूखेपन के कारण होती है। ऐसी स्थिति में नाक को दबाकर सिर ऊपर करके लेट जाएं, कुछ देर में रक्तस्राव बंद हो जाएगा। बुजुर्गों में यदि बीपी की समस्या रहती है तो वह फिजिशियन से नियमित जांच करवाते रहें। सावधानी संग दवा का नियमित सेवन करें। बीपी को कंट्रोल रखने की कोशिश करें। बीपी बढ़ने पर खतरा बढ़ जाता है। यदि यह समस्या बार-बार हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।