अमेठी। शहर स्थित डाक बंगला परिसर में रविवार को अवधी साहित्य संस्थान की ओर से कवि गोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम में अवधी साहित्य संस्थान अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पांडेय ने कहा कि हिन्दी साहित्य के संवर्द्धन में कवियों की भूमिका अहम रही है। कवि गोष्ठी की शुरुआत कवियत्री राजकुमारी संसृति की वाणी वंदना से हुई। कवि राम वदन पथिक ने पढ़ा कि वतन को लूटने वाले नहीं दीपक जलाते हैं। कवि सुधीर कुमार रंजन ने पढ़ा कि जाति धरम सबसे बड़ा, मेरा भारत देश। कविता के माध्यम से श्रोताओं की तालियां बटोरी। कवि तेजभान सिंह ने पढ़ा कि बिछे हुए कांटों को देख मैंने खुद में जान लिया। कवि शब्बीर अहमद सूरी ने पढ़ा कि हुस्न वाले बड़े बेवफा हो गए।
अवधी मधुरस ज्ञानेंद्र पांडेय ने पढ़ा कि झरि-झरि नयना झरता हौ भीतरु भमकइ आगि। कवि चंद्र प्रकाश पांडेय मंजुल ने पढ़ा ई कौनव महात्मा के रोसनी आटे, की कविता ने वाहवाही लूटी। कवि जगदंबा तिवारी मधुर ने पढ़ा कि सुना सखी संइयां नीम को छंयियां। कवि सुरेश शुक्ल नवीन ने पढ़ा कि कभी जब मौत हारेगी तो सांसें जीत जाएंगी। कवि अजय अनहद ने पढ़ा कि मुठ्ठियां भरके वे नमक लाये, घाव जिसको दिखाने वाले थे। कवि दिवस प्रताप ने पढ़ा हर कोई दौलत का दम दिखा रहा है।
कवि राजेंद्र शुक्ल अमरेश, सुधा अग्रहरि, हरिशंकर मिश्र, उदयराज वर्मा आदि कवियों ने अपनी कविताओं से सभी का मन मोह लिया। इस मौके पर कैलाश शर्मा, अनुभव मिश्र, एसएन पाल आदि मौजूद रहे।