अमेठी। कोविड संक्रमण काल में 22 मार्च के बाद पडने वाले त्यौहारों का फीकापन दहशरा के पर्व पर भी दिखेगा। वर्षों से चली आ रही विजय दशमी के दिन रावण दहन व मेला आयोजन की परंपरा भी इस वर्ष टूट जाएगी। यह स्थिति कोविड-19 को लेकर प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं देने से उपजी है।
कोविड-19 ने न सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य बल्कि उनकी आस्था पर भी आघात पहुंचाया है। कोरोना संक्रमण की वजह से 22 मार्च से अब तक कई त्योहार फीके साबित हुए हैं। इससे उपजी दहशत ने दहशरा के आयोजन पर भी ग्रहण लगा दिया है। जिला मुख्यालय व अमेठी शहर में नवरात्र व दुर्गापूजा के बाद अब दशहरा पर कार्यक्रम नहीं होगा।
एडीएम वंदिता श्रीवास्तव के अनुसार गौरीगंज की रामलीला कमेटी ने जहां प्रतीकात्मक आयोजन तक की अनुमति नहीं मांगी है वहीं अमेठी रामलीला कमेटी को इसकी अनुमति ही नहीं दी गई। बावजूद इसके अमेठी में रामलीला कमेटी ने शनिवार को रामलीला मैदान की साफ-सफाई कराई।
अमेठी रामलीला कमेटी के अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने बताया कि 46 वर्षों से वह अध्यक्ष हैं। यह पहली बार है जब दशहरे पर रामलीला मैदान में रावण कुंभकरण और विभीषण के पुतले का दहन नहीं होगा और मेला नहीं लगेगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रशासन से प्रतीकात्मक कार्यक्रम की अनुमति मांगी थी। लेकिन आज तक उन्हें कार्यक्रम की अनुमति नहीं प्रदान की गई।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन की ओर से हर बार पीस कमेटी व अन्य बैठकों में उन्हें व उनके पदाधिकारियों को बुलाया जाता था लेकिन इस बार उन्हें पीस कमेटी की बैठक में भी नहीं बुलाया गया।
उन्होंने रामलीला मैदान के साफ सफाई किए जाने के संबंध में बताया कि हर वर्ष बारिश के बाद दशहरे के पूर्व रामलीला मैदान की साफ सफाई कराई जाती है। उन्होंने कहा कि रैलियां हो रही हैं पूरे प्रदेश में दुर्गा पूजा, रामलीला कार्यक्रम एवं दशहरे पर भी कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। सिर्फ अमेठी में ही अनुमति नहीं प्रदान की जा रही। कहा कि इससे कमेटी के पदाधिकारियों सहित क्षेत्र की जनता में मायूसी है।