अमेठी सिटी। व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति रुकने और घरेलू सिलिंडर के दाम बढ़ने के बीच किल्लत की अफवाहों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। बृहस्पतिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग काम छोड़कर गैस एजेंसियों और गोदामों का चक्कर लगाते दिखे। कई उपभोक्ता निर्धारित समय पूरा होने से पहले ही सिलिंडर रिफिल कराने पहुंच गए। इससे कई स्थानों पर अफरातफरी मची रही।
गैस किल्लत की अफवाह फैलने के बाद ऐसे उपभोक्ता भी एजेंसियों पर पहुंचने लगे जो सामान्य दिनों में साल में तीन से छह बार तक ही सिलिंडर लेते थे। उज्ज्वला योजना के लाभार्थी भी बड़ी संख्या में एजेंसियों और गोदामों पर कतार में नजर आए। कुछ स्थानों पर स्टॉक खत्म हो जाने से लोगों को इंतजार करना पड़ा।
गौरीगंज शहर में हिंदुस्तान पेट्रोलियम की एजेंसी पर सुबह 11:32 बजे उपभोक्ताओं की लंबी कतार लगी रही। सिलिंडर समाप्त हो जाने से बुकिंग कराने और सिलिंडर लेने पहुंचे कई लोगों को वापस लौटना पड़ा। इस दौरान कई उपभोक्ता मोबाइल से ऑनलाइन बुकिंग कराने का प्रयास करते नजर आए।
दोपहर 12:10 बजे भारत पेट्रोलियम की एजेंसी पर भी लोगों की आवाजाही जारी रही। यहां 500 सिलिंडर का लोड पहुंचा था और लगभग उतनी ही संख्या में वितरण भी हो गया। कई उपभोक्ता ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान मोबाइल पर ओटीपी न मिलने की समस्या बताते दिखे।
दोपहर 12:42 बजे गौरीगंज के टिकरिया स्थित भारत पेट्रोलियम के गोदाम पर पहुंचे 500 सिलिंडर भी वितरित हो चुके थे। एजेंसी संचालक विजय किशोर तिवारी ने बताया कि एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है। किल्लत की अफवाह फैलने के कारण कई उपभोक्ता पहले ही सिलिंडर भरवाकर रखने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई उपभोक्ता ई-केवाईसी प्रक्रिया भी पूरी करा रहे हैं। टोल फ्री नंबर पर उपभोक्ता क्रमांक बताने से बुकिंग दर्ज हो जाती है, मगर कनेक्शन में पंजीकृत मोबाइल नंबर सक्रिय होना जरूरी रहता है।
ऑनलाइन व्यवस्था धीमी, बढ़ा इंतजार
बुकिंग और वितरण की ऑनलाइन प्रणाली धीमी रहने से उपभोक्ताओं को इंतजार करना पड़ा। कई लोगों ने बताया कि बुकिंग दर्ज होने के बाद मोबाइल पर ओटीपी नहीं पहुंच रही। वितरण के समय डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड भी देर से मिल रहा है। बुधवार को जिले में 8652 सिलिंडर की बुकिंग दर्ज हुई, जबकि 3995 सिलिंडर की डिलीवरी हो सकी। एजेंसी संचालकों के अनुसार हाल के दिनों में बुकिंग की संख्या बढ़कर लगभग आठ हजार प्रतिदिन तक पहुंच गई है, जिससे वितरण व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।