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Amethi News: भक्ति के लिए न हो कोई भौतिक कारण

Mon, 13 Oct 2025 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
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तिलोई। भागवत कथा सुनने का अधिकारी वही है जो कपट से मुक्त है। इसके लिए व्यक्ति को ईर्ष्या रहित होकर दूसरे की समृद्धि पर प्रसन्न होना सीखना पड़ेगा। ये बातें शंकरगंज के पूरे दानसिंह वैस मजरे मेढ़ौना में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को प्रवाचक आचार्य शांतनु महाराज ने कहीं।
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उन्होंने कहा कि सूतजी ने नैमिषारण्य में शौनकादि मुनि से छह प्रश्न पूछे हैं। यह पूरी भागवत कथा इन्हीं प्रश्नों के उत्तर स्वरूप है। उन्होंने कहा कि भक्ति के लिए कोई भौतिक कारण नहीं होना चाहिए। जीवन का परम उद्देश्य मात्र उस परम तत्व को जानना है और ये मनुष्य शरीर से ही भगवान के स्वरूप का साक्षात्कार किया जा सकता है। व्यासजी ने सर्वप्रथम अपने पुत्र शुकदेव महाराज को भागवत कथा सुनाई है।



प्रवाचक ने कहा कि राजा परीक्षित को शमीक मुनि के पुत्र ने श्राप दे दिया। शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाई। यजमान दंपती अर्चना सिंह व कृष्ण कुमार सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ आरती व पूजन किया। इस मौके पर राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, कुंवर मृगांकेश्वर शरण सिंह, विजय विक्रम सिंह, अमित सिंह, अनिल सिंह, गिरजा सिंह, विनोद मौर्या, नागेंद्र सिंह, विशाल सिंह, महेंद्र सिंह, सुधीर सिंह, अखंड प्रताप सिंह, दिग्विजय सिंह, नरसिंह प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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