अमेठी सिटी। जीव और ब्रह्म का मिलन ही महारास है। यह बात भेटुआ ब्लॉक के पूरे द्वारिका गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बृहस्पतिवार को प्रवाचक आचार्य गोविंद त्रिपाठी महाराज ने महारास, रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए कही।
प्रवाचक ने कथा में भगवान श्रीकृष्ण का मथुरा प्रस्थान, कंस वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उद्धव गोपी संवाद, उद्धव का गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारिका की स्थापना, रुक्मिणी विवाह का प्रसंग विस्तार से सुनाया। बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने आतताई कंस सहित अन्य राक्षसों का वध कर भक्तों की रक्षा करते हुए उन्हें अभय प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते हैं। कहा कि रास का अर्थ परमानंद की प्राप्ति है। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को रास के माध्यम से सदैव के लिए परमानंद की अनुभूति करवाई। इस दौरान डॉ. सुभाष तिवारी, रामचंद्र तिवारी, अरुण तिवारी, रमेश तिवारी, प्रदीप तिवारी, कैलाशनाथ तिवारी, संजय तिवारी, आलोक तिवारी, विद्या देवी, प्रभावती देवी आदि मौजूद रहे।