अमेठी सिटी। परतोष स्थित एक विद्यालय में विद्या भारती जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश की ओर से 10 दिवसीय नव चयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग चल रहा है। दूसरे दिन रविवार को विद्या भारती काशी प्रदेश के सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर ने अर्ली केयर चाइल्ड एजुकेशन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भव की स्वीकृति ही भाव है। हमें भावनाओं पर ध्यान देना चाहिए। यही विचार, शब्द, आदत बन जाते हैं। आदत चरित्र और चरित्र नियति बन जाती है।
उन्होंंने कहा कि आचार्य को प्रतिदिन पढ़ना और पढ़ाना चाहिए। सोते-जागते प्रतिदिन 88,000 बार कोई बात मस्तिष्क में आती व जाती है। किसी प्रकार की विकृति मन में आने के बाद हम उसका प्रतिकार कर दें तो उसी को विद्या कहते हैं।आज भौतिक संसार में हर व्यक्ति के पास साधन में वृद्धि हुई है, एक तरफ जहां साधन बढ़ रहे हैं, दूसरी तरफ हमारे संबंध में कमी आ रही है। पवित्र विचार ही हमारा मनोबल है, दूसरे की अयोग्यता से प्रभावित हो जाना ही अयोग्यता है।
कहा कि हमारी समझदारी ईमानदारी पर निर्भर करती है। जिस प्रकार ईमानदारी होगी वैसे ही हमारी जिम्मेदारी होगी और जिम्मेदारी के माध्यम से हमारी भागीदारी होती है। कहा कि घर में एक नए मेहमान के आगमन पर मां की विचारधारा धार्मिक होनी चाहिए, अच्छी पुस्तकों का स्वाध्याय करना, घर में अच्छी बातें करना। इस दौरान प्रदेश निरीक्षक राज बहादुर दीक्षित, प्रधानाचार्य संतोष मिश्र आदि मौजूद रहे।