नव भारत साक्षरता अभियान के तहत जमुवारी में पढ़ाई करतीं महिलाएं। स्त्रोत : शिक्षा विभाग
अमेठी सिटी। नव भारत साक्षरता अभियान हजारों निरक्षरों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। अब शिक्षा की राह में उम्र रुकावट नहीं बनेगी। 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के निरक्षरों को चिह्नित कर उल्लास एप पर पंजीकृत किया गया है। इसके बाद गांव-गांव कक्षाएं चल रही हैं, जहां वालंटियर उन्हें न केवल अक्षर ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि डिजिटल, वित्तीय और कानूनी समझ भी सिखा रहे हैं।
गांवों में चल रहे शिविरों में जब बुजुर्ग पहली बार अपना नाम लिखते हैं तो उनके चेहरे पर बच्चों जैसी मासूम मुस्कान खिल उठती है। जिन हाथों ने कभी कलम नहीं पकड़ी, वे अब गर्व से अपनी पहचान लिख रहे हैं। यह अभियान सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई कहानी गढ़ रहा है।
अब तक जिले में 33 नोडल सेंटर बनाए गए हैं। यहां 56 से अधिक वालंटियर निरक्षरों को पढ़ाने में जुटे हैं। मार्च से सितंबर तक 1659 निरक्षरों को साक्षर बनाया गया है। अभियान की विशेषता यह है कि इसमें कक्षा तीन से बारहवीं तक की समकक्ष शिक्षा चरणबद्ध ढंग से दी जाएगी। साथ ही रोजगार देने योग्य व्यावसायिक कौशल भी सिखाए जाएंगे।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार तिवारी ने बताया कि वर्ष 2023 में 859, 2024 में 916 और 2025 में अभी तक 1659 निरक्षरों को पढ़ना-लिखना सिखाया जा चुका है। खासकर बुजुर्गों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है।
अंगूठा नहीं लगाएंगे, हस्ताक्षर करेंगे
सेंटरों पर बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग आ रहे हैं। मुसाफिरखाना के गुन्नौर गांव निवासी माधरी (54) ने पहली बार अपना नाम लिखकर भावुक होते हुए कहा कि अब हम अंगूठा नहीं लगाएंगे, बल्कि हस्ताक्षर करेंगे। औरंगाबाद की गायत्री ने बताया कि अब वह हस्ताक्षर करती हैं तो गर्व की अनुभूति होती है। वहीं बुजुर्ग संगम ने कहा कि अब वह जोड़कर पढ़ लेते हैं और किसी पर निर्भर नहीं रहते। परिवार और गांव वालों ने भी इसे जीवन की बड़ी उपलब्धि बताया।