अमेठी सिटी। मुसाफिरखाना के प्राथमिक विद्यालय नौगीरे की इंचार्ज प्रधानाध्यापक तृप्ति सिंह ने यह साबित कर दिखाया कि दृढ़ संकल्प और समर्पण से समाज की दिशा बदली जा सकती है। उन्होंने घुमंतू मुसहर जनजाति के 37 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा, जो अब तक विद्यालय से दूर थे। साथ ही सिलाई, कढ़ाई और अन्य हस्त कौशल का प्रशिक्षण देकर छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने की राह भी प्रशस्त की है।
मुसाफिरखाना के गाजनपुर की निवासी तृप्ति सिंह की नियुक्ति बेसिक शिक्षा विभाग में प्राथमिक विद्यालय नौगीरे में मई 2018 में हुई। जुलाई 2025 में प्रधानाध्यापक पद की जिम्मेदारी मिलने के समय विद्यालय में केवल 29 बच्चे पंजीकृत थे। शिक्षामित्र मधु सिंह और वंदना के साथ शिक्षण कार्य करते हुए उन्होंने पाया कि आसपास की बस्ती के अधिकांश बच्चे विद्यालय नहीं आते है। अभिभावकों की अनभिज्ञता और घुमंतू जीवनशैली इसकी बड़ी वजह थी।
तृप्ति सिंह ने तय किया कि इन बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने लगातार अभिभावकों से संवाद किया और पढ़ाई का महत्व समझाया। धीरे-धीरे अभिभावकों का नजरिया बदला और उन्होंने बच्चों को विद्यालय भेजना शुरू किया। बच्चों की पढ़ाई सुगम बनाने के लिए तृप्ति सिंह ने निजी स्तर पर ड्रेस और बैग उपलब्ध कराए। उनके प्रयासों का असर यह हुआ कि इस सत्र में कक्षा एक में 37 नए नामांकन हुए। इनमें कई बच्चे ऐसे हैं जो पहली बार विद्यालय आए हैं।
स्कूल में सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण
बालिकाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए तृप्ति सिंह ने विद्यालय में हस्त कौशल प्रशिक्षण की शुरुआत की। छात्राएं सिलाई, कढ़ाई और अन्य गतिविधियों में दक्ष हो रही हैं, जिससे उनमें आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास बढ़ रहा है। खेलकूद गतिविधियों से बच्चों की उपस्थिति और रुचि में भी वृद्धि हुई है। तृप्ति सिंह का यह प्रयास दर्शाता है कि एक शिक्षिका ठान ले तो शिक्षा की रोशनी समाज के सबसे पिछड़े हिस्सों तक पहुंच सकती है।