जामों (अमेठी)। कुसंगति का परिणाम बहुत ही भयंकर होता है। इसके प्रभाव से मानव सुखमय जीवन व्यतीत करने के बजाय हमेशा परेशान रहता है। कलयुग में श्रीराम कथा ही भगवान की प्राप्ति का एक सरल उपाय है।
ये बातें कस्बे में स्थित मां गायत्री प्रज्ञा पीठ के पीछे विशंभर कुंज परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन शुक्रवार को बहराइच से आए प्रवाचक मुक्तिनाथ महाराज ने कहीं। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा बहुत ही सौभाग्यशाली को ही सुनने को मिलती है। प्रवाचक ने रानी कैकेई-मंथरा का प्रसंग सुनाकर यह बताने का प्रयास किया कि कुसंगति से अयोध्या जैसे नगर में अशांति फैल गई। भगवान श्रीराम को राजपाट संभालने के बजाय 14 साल जंगल में व्यतीत करने पड़े।
उन्होंने कहा कि राम कथा सुनने से मानव जीवन सुखमय हो जाता है। मनुष्य को अपने बच्चों को अनुशासित रहकर संस्कारवान बनाने की शिक्षा प्रदान करने पर परिवार सुखमय होने के साथ समाज में नाम रोशन होता है। भगवान श्रीराम ने अपने माता-पिता एवं गुरु से संस्कार सीखे, इसीलिए वह मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। वह कभी सत्य मार्ग से अडिग नहीं हुए। सत्य के मार्ग पर चलकर धर्म व समाज के कल्याण के लिए काम किया। इस अवसर पर मुख्य यजमान अवधेश कुमार श्रीवास्तव, अखिलेश कुमार, सुधीर कुमार श्रीवास्तव, सुधाकर श्रीवास्तव, आशीष श्रीवास्तव, डाॅ. उत्कर्ष कुमार श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।