अमेठी सिटी। कमजोर पड़ रहे मानसून का असर अब जनजीवन पर पड़ने लगा है। लोग जहां उमस और गर्मी से बेहाल हो रहे हैं वहीं किसान भी आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। रविवार को तापमान चढ़ा और बादल सिर्फ झलक दिखाकर निकल गए। दिनभर बिजली की आवाजाही ने भी परेशान किया।
रविवार को लोग दिनभर घरों में कैद रहे और बाजारों में भी सन्नाटा पसरा रहा। ग्राहक कम ही आए और दुकानदार दिनभर खाली बैठे रहे। इक्का-दुक्का लोग निकले भी तो छाता, गमछा और पानी की बोतल लेकर। गर्मी का असर सिर्फ आम जनजीवन पर नहीं, खेती-किसानी पर भी गहराने लगा है। धान की रोपाई का समय निकलता जा रहा है, लेकिन सिंचाई के संसाधन जवाब दे चुके हैं।
कई इलाकों में खेतों की मिट्टी सूख कर चटकने लगी है। असिंचित पट्टी में तिल, मक्का और अरहर जैसी फसलें मुरझा रही हैं। किसान निजी संसाधनों से सिंचाई कर रहे हैं, जिससे लागत लगातार बढ़ रही है। गांवों की नहरें सूखी पड़ी हैं। किसानों का कहना है कि यदि कुछ ही दिन में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल पूरी तरह चौपट हो जाएगी।
गर्मी और उमस का असर स्वास्थ्य पर भी दिख रहा है। अस्पतालों में वायरल बुखार, डायरिया और पेट दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉ. शुभम पांडेय ने बताया कि प्रतिरोधक क्षमता घटने से लोग जल्दी बीमार हो रहे हैं। उन्होंने बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को अधिकतम तापमान 32.0 और न्यूनतम 25.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र के मुताबिक अगले 24 घंटे में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश संभव है, लेकिन व्यापक राहत की फिलहाल उम्मीद नहीं दिख रही।
पानी न बरसा तो चौपट हो जाएगी फसल
सिंहपुर (अमेठी)। क्षेत्र में बारिश न होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान की रोपाई समय पर नहीं हो पा रही। नहरों में पानी पर्याप्त नहीं आ रहा और आसमान से भी राहत नहीं बरस रही। जिनके पास निजी संसाधन हैं, वे ट्यूबवेल से रोपाई कर तो रहे हैं, लेकिन सूखते खेत उम्मीदों पर पानी फेर रहे हैं। ट्यूबवेल चलाने के बावजूद गिरते जलस्तर के कारण पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पा रही।
क्षेत्र के किसान राजेश गुप्ता, इरफान अहमद, भारत मौर्य और अरुण यादव ने बताया कि धान की नर्सरी एक महीने से ऊपर की हो चुकी है। बारिश न होने से अब महंगी दर पर ट्यूबवेल से रोपाई करनी पड़ रही है।(संवाद)