अमेठी सिटी। भगवान श्रीराम की कृपा होती है, तभी राम कथा संभव होती है। राम कथा भक्ति व मुक्ति दोनों देने वाली है। राम कथा ही मनुष्य को मर्यादा में रहने की सीख देती है। ये बातें अमेठी के आवास विकास कॉलोनी में आयोजित श्रीराम कथा के पांचवें दिन प्रवाचक पंडित कृष्णानंद महाराज ने राम नाम महिमा का वर्णन करते हुए कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि भगवान राम का भावपूर्वक स्मरण करने से जीव के दुख दूर हो जाते हैं। दशरथ ज्ञान तथा सीता भक्ति है, जहां भक्ति होती है वहीं भगवान निवास करते हैं। कहा कि भगवान श्रीराम ने सदैव मर्यादा में रहते हुए कर्तव्य, धर्म व सत्य का पालन किया। उन्होंने किसी भी परिस्थिति में अपने धर्म का त्याग नहीं किया। मनुष्य को प्रभु श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
बताया कि सच्चे मन से भगवान का नाम सुमिरन करने वाले पर संकट नहीं आता। भक्ति में रमने वाला हर समय धर्म का कार्य करता है। ऐसे भक्तों पर ईश्वर की कृपा होती है और उन्हें जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस मौके पर डॉ. अक्षयवरनाथ तिवारी, पंडित सीबी मिश्र, ओमप्रकाश तिवारी, जगत नारायण मिश्र, अजय अग्रहरि, शिवकुमार सोनी, अंशु श्रीवास्तव, संतोष चतुर्वेदी, रमेश तिवारी, भगवत प्रसाद मिश्र, उपमा मिश्रा आदि मौजूद रहे।