अमेठी सिटी/मुसाफिरखाना। मुहर्रम की दसवीं तारीख पर जिलेभर में गम और अकीदत का माहौल रहा। इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में कस्बों और गांवों में पारंपरिक ढंग से ताजिया जुलूस निकाले गए। कर्बला में नम आंखों से ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। इसके साथ ही मातम किया गया।
डीएम संजय कुमार और एसपी अपर्णा रजत कौशिक ने जायस, जगदीशपुर और मुसाफिरखाना का भ्रमण कर जुलूस मार्ग और संवेदनशील इलाकों की निगरानी की। अफवाहों पर ध्यान न देने और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई। मुसाफिरखाना के भनौली गांव में बड़े इमामबाड़े से ताजिया जुलूस निकला जो इमामबाग, दरगाह आलिया हजरत अब्बास होते हुए बीएसएनएल एक्सचेंज तक गया। मौलाना अली मोहम्मद, मौलाना मूसवी रजा और मौलाना डॉ. अबूजर अली ने तकरीर में कर्बला की पीड़ा साझा की। अंजुमन सिपाहे हुसैनी के नौजवानों ने जंजीरजनी कर बीबी फातिमा जहरा को पुरसा पेश किया। जुलूस के अंत में समाजसेवी इकबाल हैदर ने फाका शिकनी का इंतजाम किया।
फातिहा में साथ दिखे हिंदू-मुस्लिम
जगदीशपुर (अमेठी)। निहालगढ़, मंगरौरा, मलावा, निहालपुर सहित कई गांवों में हिंदू समुदाय के लोगों ने भी ताजिया जुलूस में हिस्सा लिया। फातिहा और दुआ के साथ दोनों समुदायों ने मिलकर इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि दी। लोगों ने इसे सामाजिक एकता का प्रतीक बताया। (संवाद)
जुलूस निकाल युवाओं ने की सीनाजनी
फुरसतगंज (संवाद)। चंदू बाबू के घर से ताजिया जुलूस निकला जो चिकवा मोहल्ला, स्टेशन रोड, पीढ़ी रोड होते हुए कर्बला पहुंचा। रास्ते में अजादारों ने मातम और सीनाजनी की। जावेद सिद्दीकी, जमीर खान, सुफियान, रईस, फिरोज, नईम, अलीम आदि मौजूद रहे। लंगर और शरबत का इंतजाम भी किया गया। जायस कस्बे में भी ताजिया जुलूस निकाल युवाओं ने सीनाजनी करते हुए मातम किया।(संवाद)