अमेठी। जिले में बिजली की खपत के साथ मुश्किलें भी बढ़ती जा रही है। मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो रहा है। हालत ये है कि लोगों की रात की नींद हराम हो गई है। जिले में खपत तेजी से बढ़ रही है। शुक्रवार को यह आंकड़ा 264 मेगावाट तक पहुंच गया, जबकि कुल क्षमता 446 मेगावाट है।
विभागीय नियंत्रण और जवाबदेही की कमी साफ दिखाई दे रही है। ओवरलोडिंग के कारण आए दिन तार टूटते हैं, जंपर उड़ते हैं और सप्लाई बाधित हो जाती है। वहीं दूसरी ओर बारिश न होने के कारण किसान सिंचाई के लिए निजी और राजकीय नलकूपों का सहारा ले रहे हैं।
एक साथ नलकूपों के संचालन से फीडर ओवरलोड हो रहे हैं और बार-बार ट्रिपिंग की स्थिति बन रही है। बीते पंद्रह दिनों में मांग 264 से बढ़कर 337 मेगावाट तक पहुंच गई है। जिला मुख्यालय पर औसतन 17 से 18 घंटे बिजली मिल रही है, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह अवधि घटकर आठ से दस घंटे रह गई है। तय रोस्टर पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।
सूत्रों के मुताबिक, एक ट्रांसफार्मर से जुड़े तीन फीडरों में से एक को आधे घंटे के लिए बंद कर शेष दो को चालू रखा जाता है, ताकि अधिक लोड से उपकरण खराब न हों। गर्मी के चलते पंखे, कूलर और नलकूपों का उपयोग बढ़ गया है। खेतों की सिंचाई के लिए बड़े पैमाने पर मोटरों का सहारा लिया जा रहा है, जिससे लोड फैक्टर 200 एंपियर के पार पहुंच गया है। जबकि सामान्य औसत 170 से 180 एंपियर माना जाता है।
इससे फीडरों पर ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। उपकेंद्रों पर ट्रांसफार्मर अधिक गर्म हो रहे हैं, जिससे फॉल्ट की घटनाएं बढ़ी हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि फीडरों को बारी-बारी से बंद कर आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश हो रही है, मगर यह भी स्थायी समाधान नहीं है। (संवाद)