अमेठी। जांच के दौरान अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंसेज के फर्जीवाड़े की परत खुलने लगी है। संस्था ने छात्रों से लाखों रुपये वसूलने के साथ सरकारी अस्पतालों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ट्रेनिंग तक करा दी। जांच में सामने आया कि कॉलेज प्रबंधन ने सीएमओ कार्यालय और सीएचसी प्रभारियों को जाली हस्ताक्षर और नकली मुहर वाले पत्र भेजे थे, जिनमें कॉलेज को मान्यता प्राप्त बताया गया था। इन दस्तावेजों पर भरोसा करते हुए ही यहां के विद्यार्थियों को सरकारी अस्पतालों में ट्रेनिंग की अनुमति मिलती रही।
अब मामले का खुलासा होने के बाद प्रशिक्षण पूरा करने का कोई प्रमाणपत्र और डिग्री का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। पीड़ित छात्र शिवम तिवारी ने बताया कि कॉलेज प्रशासन ने कहा था कि संस्था 2017 से मान्यता प्राप्त है और सरकारी अस्पतालों में ट्रेनिंग उसकी प्रक्रिया का हिस्सा है। अभिभावक संतोष सिंह का कहना है कि इतने समय तक यह खेल विभाग की अनदेखी या मिलीभगत के बिना संभव नहीं हो सकता। अगर समय पर जांच होती तो छात्रों का भविष्य बर्बाद होने से बचाया जा सकता था।
छात्र राजेश कुमार ने बताया कि कॉलेज फीस जमा करने पर बाकायदा इसकी रसीद देता था। कॉलेज लैब दिखाकर पहले छात्रों का विश्वास जीतता और फिर फर्जी लेटरपैड से सीएचसी में ट्रेनिंग कराने भेज देता था। कई छात्रों को फर्जी मार्कशीट देकर कोर्स पूरा करना दिखाया गया, जबकि कुछ को किसी अन्य कॉलेज से जोड़कर ठग लिया गया।
जिले में केवल तीन संस्थानों को मान्यता
स्टेट मेडिकल फैकल्टी लखनऊ के अभिलेखों के अनुसार अमेठी में केवल तीन संस्थानों को पैरामेडिकल शिक्षा की मान्यता प्राप्त है, जिनमें एआईपीएस का नाम नहीं है। मान्यता प्राप्त संस्थानों में इंदिरा गांधी स्कूल ऑफ नर्सिंग, इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज व ऑटोनोमस स्टेट मेडिकल कॉलेज के नाम शामिल हैं। इसके बावजूद यह संस्था न केवल प्रवेश लेती रही, बल्कि छात्रों को सीएचसी में ट्रेनिंग के लिए भी भेजती रही। इसके बावजूद विभादीय जिम्मेदारों को इसकी कोई जानकारी नहीं हो सकी।
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंसेज के फर्जीवाड़े की जांच चल रही है। जांच में जो तथ्य प्रकाश में आ रहे हैं, उनकी विस्तृत पृष्ठभूमि जांच की जा रही है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे ट्रेनिंग कराने की सूचना मिली तो उस तथ्य की भी पड़ताल कराई जा रही है। रिपोर्ट आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।