संग्रामपुर के धौरहरा गांव में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
संग्रामपुर। धौरहरा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को प्रयागराज से आए प्रवाचक देवव्रत ने श्रद्धालुओं को धर्म के मर्म से परिचित कराते हुए अच्छे कर्म करने और दूसरों के प्रति संवेदनशील रहने की प्रेरणा दी। कहा कि धर्म का वास्तविक अर्थ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने आचरण में सत्य, करुणा और परोपकार को उतारना भी है।
प्रवाचक ने कहा कि मनुष्य के विचार ही उसके व्यवहार और व्यक्तित्व की दिशा तय करते हैं। मन में सकारात्मकता होगी तो कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की क्षमता बनी रहेगी। इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति क्रोध, ईर्ष्या और अहंकार से दूर रहकर धैर्य, क्षमा और विनम्रता को अपनाए।
उन्होंने कहा कि धर्म का पालन तभी सार्थक है, जब मनुष्य अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाए। माता-पिता का सम्मान, परिवार के प्रति जिम्मेदारी, जरूरतमंदों की सहायता और सत्य का साथ देना भी धर्म के महत्वपूर्ण अंग हैं। इस मौके पर बृजबली सिंह, नरेंद्र बहादुर सिंह, अशोक सिंह, बृजेश सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, कमलेंद्र प्रताप सिंह, आशीष सिंह गुड्डू, शैलेश सिंह, राजकुमार सिंह और मनीष सिंह आदि मौजूद रहे।