अमेठी। किसानों को आधुनिक खेती-किसानी की जानकारी देने के लिए शुक्रवार को पूरे बेनी भदौरिया गांव में किसान-वैज्ञानिक संवाद गोष्ठी आयोजित हुई। गोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेतों की मेड़ों पर अरहर की बोआई करने की सलाह देते हुए खेती के साथ पशुपालन करने की सलाह दी। जगदीशपुर के कठौरा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से अंगीकृत गांव पूरे बेनी भदौरिया में शुक्रवार को कृषक-वैज्ञानिक संवाद एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति प्रोफेसर अरुण कुमार सिंह ने कहा कि देश एवं प्रदेश को दलहन तथा तिलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस समय अरहर एवं तिल की बोआई जरूर करें। ऐसे स्थान जहां पर बोआई के बाद अरहर गलने की संभावना रहती है। यदि मेड़ पर अरहर की बोआई की जाए तो बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है।
भारतीय बागवानी विकास फाउंडेशन सहायक निदेशक जितेंद्र तिवारी ने कहा कि यदि खरीद के मौसम में प्याज की खेती की जाए तो कम जगह में अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है। इंसेक्टिसाइड इंडिया लिमिटेड जोनल इंचार्ज रामेश्वर कुशवाहा ने धान एवं सब्जियों में लगने वाले रोग कीट एवं उसके उपाय बताएं। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरके आनंद ने क्लस्टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के बारे में बताया। प्रगतिशील किसान संजय सिंह ने कहा कि किसानों को उन्नतशील बीज मिलने से क्षेत्र में फसलों की पैदावार बढ़ेगी।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने अरहर की उन्नतशील प्रजातियों तथा इसकी कृषि तकनीकी विस्तार से बताई। दुग्ध विकास अधिकारी सुनील सिंह, प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी संजय यादव, कृषि विभाग के अरविंद वर्मा, डॉ. सुरेंद्र सिंह ने पशुपालन तथा डॉ. ओपी सिंह ने तिल की खेती के बारे में विस्तार से बताया। केंद्र के कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक डॉक्टर भास्कर प्रताप सिंह ने वर्षा जल संरक्षण पर विशेष बल दिया। कार्यक्रम में 30 किसानों को क्लस्टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन योजना अंतर्गत अरहर एवं तिल का बीज वितरित किया गया। अनिल कुमार सिंह, गंगा पाल सिंह, प्रभात सिंह, यशकेंद्र सिंह, शिव बहादुर सिंह, छेदीलाल, ललिता एवं जरीना आदि मौजूद रहे।