हाईटेक हाइड्रोपोनिक्स इकाई में तैयार हो रहे पौधे। संवाद
अमेठी/जगदीशपुर। सीमित जमीन, बढ़ती लागत और मौसम के उतार-चढ़ाव से जूझ रहे किसानों के सामने अब नई तकनीक विकल्प बनकर उभरी है। कृषि विज्ञान केंद्र कठौरा परिसर में 1000 वर्ग फीट क्षेत्र में हाईटेक हाइड्रोपोनिक्स इकाई स्थापित की गई है। यहां सलाद पत्ता और पालक की पहली फसल तैयार हो रही है। करीब 4.5 लाख रुपये की लागत से बनी यह संरचना जिले में आधुनिक कृषि का मॉडल बन रही है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि इस पद्धति में मिट्टी का इस्तेमाल नहीं होता। कोको पिट और वर्मी कम्पोस्ट के मिश्रण में पौध तैयार की जाती है। नियंत्रित माहौल में 20 से 22 डिग्री सेल्सियस तापमान पर फसल बेहतर बढ़ती है। पारदर्शी प्लास्टिक कवर से छनकर धूप अंदर पहुंचती है। तापमान बढ़ने पर एग्जॉस्ट फैन और फव्वारा प्रणाली से वातावरण संतुलित रखा जाता है।
इकाई में लैट्यूस और पालक की दो किस्में तैयार की गई हैं। बाजार में सलाद पत्ते का भाव 400 से 500 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है। पत्तेदार सब्जियों का उत्पादन सालभर संभव है। कम जगह और सीमित पानी में अधिक उपज मिलने से आमदनी बढ़ाने की संभावना बनती है। केंद्र परिसर में यह इकाई प्रदर्शन के रूप में खुली है। इच्छुक किसान तकनीक का अवलोकन कर प्रशिक्षण ले सकते हैं। प्रशिक्षण के बाद अपने स्तर पर संरचना स्थापित कर उत्पादन शुरू किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ इस पद्धति को अपनाने से आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कम जगह और सीमित पानी में उच्च गुणवत्ता की फसल देती है। इसे अपनाने पर अतिरिक्त आय का सशक्त माध्यम तैयार हो सकता है।