जामों (अमेठी)। श्रीमद्भागवत कथा भगवान श्रीकृष्ण की शब्दावली है। इसमें सभी पुराण, चारों वेद एवं छह शास्त्रों का संपूर्ण ज्ञान समाहित है। यह कथा मानव के मन को शांति प्रदान करने व पवित्र करने का एकमात्र सरल उपाय है। ये बातें ग्राम पंचायत पूरब गौरा के धरमगदपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रवाचक गरुणेश ने कहीं।
उन्होंने बताया कि जिस तरह सूर्य संपूर्ण सृष्टि में फैले अंधकार को दूर करके उजाला कर देता है, उसी प्रकार श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य के जीवन के अंदर मन में व्याप्त अज्ञान रूपी अंधकार को खत्म करने में सक्षम है। सत्कर्म के बाद ही भगवान श्रीकृष्ण की कथा सुनने का अवसर मनुष्य को मिलता है। ईश्वर की कृपा होने पर ही व्यक्ति के मन में भागवत कथा सुनने की इच्छा प्रकट होती है।
प्रवाचक ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा साक्षात कल्पवृक्ष है। श्रीमद्भागवत कथा देशभर के सभी ग्रंथों में सर्वश्रेष्ठ है। इसके श्रवण मात्र से मनुष्य अपने जीवन काल में किए गए पाप कर्मों से आसानी से छुटकारा पा जाता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान मोती चंद्र उपाध्याय, सुरेश चंद्र उपाध्याय, रमेश चंद्र उपाध्याय, अरविंद कुमार, इंद्रकुमार, राहुल कुमार आदि मौजूद रहे।