मुसाफिरखाना (अमेठी)। श्रीराम कथा जीवन का प्रबंधन है। यह मनुष्य को जीना सिखाती है। गाजनपुर में आयोजित राम कथा के प्रथम दिन प्रवाचक पं. राममिलन शुक्ल ने ये बातें कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि कलयुग में मन को निर्मल करने के लिए राम नाम स्मरण और कथा श्रवण ही तपस्या के समान है। श्रीराम की कथा सुनने से मनुष्य में ज्ञान, भक्ति एवं सौंदर्य का विकास होता है। पं. अवधेश तिवारी ने कहा कि जीवन की सार्थकता परमात्मा से जुड़ने में है। जैसे बिजली का तार पावर हाउस से जुड़कर विभिन्न प्रकार की सक्षमताएं प्राप्त कर लेता है, वैसे ही संतों, शास्त्रों और विद्वानों के माध्यम से परम चेतना से जुड़कर मनुष्य पुरुष से पुरुषोत्तम बनने की क्षमता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण के जाने की कथा सुनाई।
पं. गंगा सागर तिवारी ने कहा कि कलयुग में मनुष्य अल्पायु होता है, इसलिए अन्य युगों की तुलना में लंबी तपस्या संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कलयुग की अपनी विशेषता है। इसमें मात्र राम नाम के उच्चारण से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। यह मोक्ष प्राप्त करने का सबसे सरल साधन है। इस अवसर पर डॉ. हरिद्वार सिंह, विजय किशोर तिवारी, हारित सिंह, राम अचल तिवारी, राम प्रताप, बृज किशोर आदि मौजूद रहे।