अमेठी। भेटुआ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भुसियावा की प्रधानाध्यापक शैलजा गोंड स्कूली बच्चों संग महिलाओं को सफलता की राह दिखा रही हैं। वह शिक्षा के साथ कौशल विकास के जरिये आत्मनिर्भर बनने पर जोर दे रही हैं। उनके इस प्रयास की चहुंओर सराहना हो रही है। शैलजा ने शिक्षकों की ब्लॉक और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभा दिखाते हुए कई सम्मान प्राप्त किए हैं।
शिक्षिका शैलजा ने शिक्षा के साथ सामाजिक बदलाव को भी अपना लक्ष्य बनाया। उन्होंने विद्यालय को केवल पढ़ाई तक सीमित न रखकर उसे आकर्षक शिक्षण सहायक सामग्री (टीएलएम) से सजाया है। रंग-बिरंगे चार्ट और चित्रों से भरी कक्षाओं में बच्चे खेल-खेल में अच्छी बातें सीख रहे हैं। इसी का परिणाम है कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है।
बच्चों के नामांकन भी बढ़कर 95 हो गए हैं। विद्यालय में उन्होंने बच्चों को कौशल विकास से भी जोड़ा। स्कूल में सिलाई-कढ़ाई, चित्रकला, रंगोली और क्राॅफ्ट कार्य का नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है। इन गतिविधियों से बच्चों में आत्मविश्वास और रचनात्मकता का विकास हो रहा है।
चौपाल में कर रहीं जागरूक
शैलजा ने समाज की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया है। वह महिला चौपाल आयोजित कर शिक्षा, स्वावलंबन और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी देती हैं। महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देकर आय वृद्धि के लिए प्रेरित कर रही हैं। भुसियावा की 35 महिलाएं उनसे प्रशिक्षण ले चुकी हैं। शैलजा का मानना है कि जब महिलाएं जागरूक होंगी तो बच्चों की शिक्षा को नई दिशा मिलेगी।
दो साल पहले मिला प्रमोशन
मूलरूप से गाजीपुर के बेलासी गांव की शैलजा गोंड ने वर्ष 2010 में बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के रूप में अपनी सेवा शुरू की। पहली तैनाती संग्रामपुर ब्लॉक के बड़गांव प्राथमिक विद्यालय में हुई। समायोजन के बाद उन्हें एचएएल गेट परिषदीय विद्यालय भेजा गया। उत्कृष्ट कार्य और लगन के चलते पदोन्नति पाकर 2023 में वह भेटुआ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भुसियावा की प्रधानाध्यापक बनीं।