जामों। माता-पिता की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। सनातन धर्म देशभर के सभी धर्मों में सर्वश्रेष्ठ है। ये बातें हरगांव बाजार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन मंगलवार को अयोध्या धाम से आए प्रवाचक आचार्य दिनकर महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि कलयुग के प्रभाव से मनुष्य लोभ, माया, मोह के जंजाल में फंसकर अपना जीवन बर्बाद कर लेता है। मानव जीवन में ईश्वर की आराधना और पूजा-पाठ का महत्व होता है। मनुष्य का जीवन अध्यात्म की ओर अधिक हो जाता है। उनके मन से दुर्व्यवहार, दुर्गुण, द्वेष अपने आप खत्म हो जाता है।
प्रवाचक ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में रहस्य छिपा है। भगवान श्रीकृष्ण ने बाल रूप में ही बड़े-बड़े राक्षसों को समाप्त कर दिया। गाय चराते हुए बाल सखाओं से मिलकर सबसे मित्रता की। सभी की भलाई का ध्यान रखते हुए अपने लोगों का कल्याण किया। इस अवसर पर मुख्य यजमान अमित कुमार श्रीवास्तव, उनकी पत्नी कुसुमलता श्रीवास्तव, मंदिर के पुजारी रेखादास, कालिका प्रसाद शुक्ल, आनंद सिंह, रामगोपाल मिश्र, आयुष, रज्जन, कौशल, बबलू पांडेय, सौरभ पांडेय आदि मौजूद रहे।