गौरीगंज (अमेठी)। अयोध्या से आई विजिलेंस टीम ने बुधवार को कार्यालय जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायतें के ज्येष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह को पूर्व प्रधान के पुत्र से पांच हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। गुरुवार को गोरखपुर ले जाकर उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।
अमेठी ब्लॉक की ग्राम पंचायत जंगल रामनगर की पूर्व प्रधान उर्मिला देवी की वित्तीय वर्ष 2018-19 में कराए गए कार्यों का ऑडिट कार्य शेष था। कार्यालय जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायतें के ज्येष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ऑडिट कर रहे थे।
प्रधान के पुत्र रवींद्र ने मार्च में एसपी विजिलेंस को शिकायती पत्र देकर प्रवीण सिंह पर ऑडिट के नाम पर एक लाख रुपये घूस मांगने का आरोप लगाया था।
प्रधान पुत्र के अनुसार उक्त अफसर द्वारा ऑडिट पूरी कर ली गई थी लेकिन एक लाख रुपये लिए बिना फाइल न देने की बात कही जा रही थी। कहा कि इससे पहले उन्हें 30 हजार रुपये दिये थे। इस पर एसपी विजिलेंस की ओर से निरीक्षक अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित टीम बुधवार को जिला मुख्यालय पहुंची और डीएम से गवाह के रूप में दो मजिस्ट्रेट नामित कराकर उन्हें अपने साथ ले लिया।
टीम के कहने पर रवींद्र ने ऑडिटर को एक रेस्टोरेंट बुलाया। हालांकि ऑडिटर ने रवींद्र को बाजार स्थित एक स्वीट हाउस पर आकर मिलने को कहा। रवींद्र स्वीट हाउस पर पहुंचा। वहां ऑडिटर के साथ नाश्ता करने के बाद उसने पांच हजार रुपये उन्हें दिया जिसे ऑडिटर ने अपनी जेब में रख लिया।
इसी बीच वहां मौजूद विजिलेंस टीम ने प्रवीण को घूस लेते गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद प्रवीण को गौरीगंज थाने लाया गया जहां हाथ धुलाने पर उनका हाथ लाल हो गया। घूस में दी गई रकम पांच हजार निकली जो टीम द्वारा शिकायतकर्ता को दी गई थी। अभिलेखीय कार्य पूरा करने के बाद टीम उन्हें लेकर अयोध्या के लिए रवाना हो गई।
टीम लीडर प्रभारी निरीक्षक अजय प्रताप सिंह ने बताया कि इसका मुकदमा अयोध्या में दर्ज कराया जाएगा। गुरुवार को आरोपी को एंटी करप्शन न्यायालय गोरखपुर में पेश किया जाएगा। टीम में कुल सात सदस्य मौजूद थे।
बुधवार को ऑडिटर की हुई गिरफ्तारी जिले में इस तरह का कोई नया मामला नहीं है। 17 जून को भी लखनऊ से आई विजिलेंस टीम ने जिले की डीपीआरओ श्रेया मिश्रा को उनके कार्यालय में बाजार शुकुल में तैनात सफाई कर्मी से 30 हजार रुपये की घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। बाद में डीपीआरओ को इस मामले में निलंबित भी कर दिया गया।