अमेठी। छह वर्ष पूर्व निर्मित लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े बाईपास के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण से पहले मुआवजा के नाम पर जिम्मेदार अफसरों ने 380 करोड़ रुपये लुटा दिए। मामला सामने आनेे के बाद कराई गई जांच में मिले तथ्यों से प्रशासनिक अमला सकते में है।
केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद वर्ष 2016 में लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण (टू लेन से बढ़ाकर फोर लेन) की कवायद शुरू हुई। राजमार्ग बनने के बाद लोगों को जाम से नहीं जूझना पड़े इसके लिए जिले से होकर गुजरने वाले 49.5 किमी मार्ग पर जगदीशपुर (उतेलवा से कनकूपुर) व मुसाफिरखाना में (मठा भुसुंठा से सराय सुलेमान) तक बाईपास का सर्वे हुआ।
इस सर्वे में कुल 30 गांव आए। यहां की सभी जमीनें भी कृषि कार्य से जुड़ी थीं। इसी तरह 15 गांव की कई हेक्टेयर जमीनें ऐसी थीं जो एनएच चौड़ीकरण में आ रही थीं। सर्वे पूरा होने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राजस्व विभाग से मुआवजा वितरण की कार्रवाई पूरी कराने को कहा।
एनएचएएआई के अनुरोध पर राजस्व विभाग के तत्कालीन अफसरों ने बाईपास जाने से प्रभावित किसानों को नियम ताक पर रखते हुए एनएच के चौड़ीकरण से प्रभावित किसानों के बराबर मुआवजा दे दिया। दोनों बाईपास पर मुआवजे के रूप में वितरित की गई रकम करीब 560 करोड़ रुपये के आसपास बताई जा रही है।
वाद पर सुनवाई में हुआ खुलासा
मामले का खुलासा तब हुआ जब एनएचआई की ओर से 2020 में दायर आर्बिटे्रशन वाद की फाइल कुछ दिन पूर्व मौजूदा जिला मजिस्ट्रेट के सामने आई। दायर वाद में एनएचएआई ने अभिनिर्णय व भुगतान पर प्रश्नचिन्ह लगाया था। वाद पत्रावली देखते ही जिला मजिस्टे्रट को लगा कि इसमें बड़ा खेल किया गया है।
चार सदस्यीय टीम ने की जांच
दायर वाद व उसमें लगे तथ्यों की जानकारी होने के बाद डीएम राकेश कुमार मिश्र ने एडीएम न्यायिक राजकुमार द्विवेदी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम गठित कर दी। टीम में एडीएम न्यायिक के अलावा मुख्य कोषाधिकारी आलोक राजवंशी, एआईजी स्टांप सीपी मौर्य व एसडीएम मुसाफिरखाना सविता यादव को शामिल किया गया। टीम ने जांच शुरू की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। टीम ने पाया कि यदि मुआवजा वितरण में गड़बड़ी नहीं की गई होती तो 560 करोड़ के बजाए करीब 200 करोड़ रुपये ही खर्च होते।
किया गया बड़ा खेल
जांच टीम में शामिल एक अफसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि मामले में बड़ा खेल किया गया है। तत्कालीन अफसरों ने जगदीशपुर बाईपास पर स्थित 95 हेक्टेयर व मुसाफिरखाना बाईपास पर 39 हेक्टेयर कृषि भूमि के स्वामियों को एनएच से सटी जमीनों की दर के हिसाब से मुआवजे का भुगतान कर दिया। इस प्रक्रिया में एनएचएआई को करीब 380 करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाई गई। प्रथम दृष्टया इसके प्रमाण भी मिले हैं।
बोलने को तैयार नहीं अफसर
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कोई भी अफसर इस मामले में कुछ बताने को तैयार नहीं है। इस मामले में जिस भी अफसर से अधिकृत बयान देने को कहा गया वे सभी इससे बचते नजर आए।