अमेठी। वर्ष 1990 में बजरंग दल रायबरेली के संगठन प्रमुख बालाजी के मार्गदर्शन में 12 लोगों की टोली के साथ बजरंग दल के खंड संयोजक लफड़ादास महाराज अयोध्या के लिए निकले थे। पगडंडियों, नदी तालाब पोखर से होते हुए बड़ी कठिनाई के साथ वह ढांचे के पास पहुंच गए। वह दीवार के सहारे खड़े होकर अपने कंधा देकर लोगों को ढांचे पर चढ़ा रहे थे।
अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कारसेवक रहे मुसाफिरखाना, जगदीशपुर के कंजास गांव महावीरन धाम के संत लफड़ा दास महाराज को आमंत्रण पत्र मिला है। इस पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जो कुछ हम लोग पहले सोचते थे वह स्वप्न की तरह लगता था। राम मंदिर का संकल्प आज पूरा हो रहा है, सभी सनातनियों के लिए यह गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि 21 वर्ष पूर्व रायबरेली के श्री 1008 निर्मल दास महाराज की प्रेरणा से उन्होंने संत वेश धारण किया। करीब 18 वर्षों से वह महावीरन धाम पर रहकर बजरंगबली और प्रभु श्रीराम की सेवा कर रहे हैं।
आंखों और चेहरे पर लगाया गया था खास पाउडर
संत लफड़ा दास ने बताया कि जब वह कारसेवक के रूप में लोगों को कंधों के सहारे ऊपर चढ़ा रहे थे, उसके पूर्व संगठन की ओर से पूरी तैयारी की गई थी। कहा कि उन लोगों के चेहरे पर एक खास पाउडर लगाया गया था। जब आंसू गैस के गोले व अन्य गैस छोड़कर भीड़ को हटाया जा रहा था, उस समय गैस का असर उनकी आंखों पर नहीं हो रहा था। वह बगैर किसी परेशानी के घायल कारसेवकों की मदद कर पा रहे थे। ढांचा ढहाया जा रहा था पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही थी और लोग अपना काम कर रहे थे।
इस तरह पड़ नाम
संत लफड़ा दास बताते हैं कि वह विद्यार्थी जीवन से ही बजरंग दल में रहे। बाल्य काल से ही धर्म के खिलाफ कोई बात बर्दाश्त नहीं होती थी। 1970 के दशक में रायबरेली संगठन में पूर्णकालिक बाबूलाल जी हुआ करते थे। हिंदुत्व की बातों पर उग्र होने आदि को लेकर वह हमेशा उन्हें क्रांतिकारी कहा करते थे तो वहीं अन्य साथी व पदाधिकारी लफड़ा दास कहकर संबोधित करते थे। तब से उनका नाम लफड़ा दास हो गया। संत जीवन में आने के बाद वह लफड़ा दास महाराज से मशहूर हुए। उन्होंने बताया कि धर्म की रक्षा, गोरक्षा समेत के मामले में उन पर 50 से अधिक केस दर्ज हुए थे। अब एक-दो केस ही शेष हैं।