अमेठी। प्रधान डाकघर पर डाक सेवकों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ मंगलवार को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी सांकेतिक हड़ताल की। कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर विरोध दर्ज कराया। डाक विभाग को ग्रामीण भारत की रीढ़ बताते हुए सरकार की नीतियों को कर्मचारी-विरोधी करार दिया।
कार्यालय के बाहर विरोध जाहिर करते हुए डाककर्मियों ने कहा डाक विभाग देश के अंतिम छोर तक पहुंचने वाली एक महत्वपूर्ण सरकारी सेवा है। मौजूदा समय में इसे कमजोर करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। आईडीसी, अंधाधुंध मशीनीकरण और ब्रांच पोस्ट मास्टर और असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर के जबरन विलय जैसे निर्णयों से दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित शाखा डाकघरों को बंद किया जा रहा है। सरकार के इस कदम से ग्रामीण संचार व्यवस्था खतरे में पड़ गई है।
प्रदर्शन कर रहे डाक सेवकों उन्हें आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के दायरे में लाने की मांग की। कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार उन्हें सिविल सेवक का दर्जा दिया जाए। पेंशन, ग्रेच्युटी, चिकित्सकीय सुविधा जैसी वर्षों से लंबित मांगों को तुरंत पूरा किया जाए। मौजूदा कैडर और ग्रामीण शाखा डाकघरों का संरक्षण किया जाए। डाक सेवकों ने चेतावनी दी कि उनकी मांगों पर सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस मौके पर एसपी पाठक, जिला सचिव काशी नरेश पांडेय, अशोक मिश्र, रवींद्र पाठक, बाबूराम मिश्र, राम आसरे सोनकर आदि मौजूद रहे।
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बड़ी संख्या में वापस लौटे लोग
प्रधान डाकघर अमेठी में सुबह हड़ताल के चलते बैंकिंग संबंधित बचत, एनएससी, म्यूचल फंड, नया खाता खुलने, पासबुक अपडेट कराने, एफडी आदि काम प्रभावित रहे। ग्राहकों को डाकघरों से मायूस होकर लौटना पड़ा। प्रधान डाकघर में रुपये निकालने आए ठेंगहा निवासी शैलेंद्र ओझा ने बताया कि हड़ताल करनी है तो पहले ही इसकी जानकारी ग्राहकों को दी जानी चाहिए। हालांकि, दोपहर बाद कुछ कर्मचारी हड़ताल से वापस लौटे, जिसके बाद कुछ काउंटर पर लोगों को सुविधा मिलने लगी।