लाभार्थियों से सहमति पत्र लिया जाता
फाउंडेशन की टीम पहले लाभार्थियों की सूची बनाती है, जिला प्रशासन से समन्वय करती है, और लाभार्थियों को राष्ट्रीय पोर्टल पर पंजीकृत कराती है। फिर चयनित वेंडर घर जाकर छत का निरीक्षण करता है, दस्तावेज़ इकट्ठा करता है, और सोलर सिस्टम इंस्टॉल करता है। स्थानीय ग्रामीणों के साथ बैठकों का आयोजन कर योजना के लाभों की जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही लाभार्थियों से सहमति पत्र लिया जाता है और प्लांट की स्थापना के बाद बिजली विभाग से प्रमाण-पत्र लेकर भुगतान प्रक्रिया पूरी होती है।
ये योजना एक नई रोशनी की शुरुआत
पीएम सूर्य घर योजना का उद्देश्य हर आम नागरिक को बिजली उत्पादन में भागीदार बनाना है। योजना के तहत एक से छह किलोवाट तक के सोलर पैनल सब्सिडी के साथ लगाए जा रहे हैं। इससे न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी होती हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली ग्रिड में बेचकर आमदनी भी होती है। मान लीजिए किसी लाभार्थी ने एक किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया, जिसकी लागत करीब 65 हजार रुपये है। इसमें सरकार की सब्सिडी 45 हजार रुपये और अदाणी फाउंडेशन का योगदान 15 हजार रुपये है। ऐसे में लाभार्थी की हिस्सेदारी सिर्फ पांच हजार है। इससे रोजाना औसतन 4.5 यूनिट, यानी हर महीने 135 यूनिट बिजली का उत्पादन होता है, जिससे हर महीने 877 रुपये तक की आमदनी होती है। यही नहीं, दो किलोवॉट पर लगभग एक हजार 755 रुपये, तीन किलोवाट पर दो हजार 632 रुपये, और छह किलोवाट के सिस्टम पर पांच हजार 265 रुपये प्रति माह तक की कमाई की जा सकती है। यह वो स्थायी आय है, जो एक बार की मामूली पूंजी से बरसों तक चलती है।
गांवों की जिंदगी में बड़ा बदलाव
सौर ऊर्जा में अपार संभावनाएं हैं। यह न सिर्फ स्वच्छ है, बल्कि लगभग शून्य रखरखाव पर चलती है। आज जहां कोयले, तेल और गैस की कीमतें वैश्विक राजनीति से प्रभावित होती हैं। वहीं सूरज हर दिन मुफ्त में उगता है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, अगले एक दशक में सौर ऊर्जा की लागत में 20 से 25 फीसदी तक गिरावट आएगी। ऐसे में भविष्य में यह ऊर्जा का सबसे सस्ता और सुलभ स्रोत बन जाएगा। योजना का सबसे बड़ा असर गांवों में देखने को मिल रहा है। जहां पहले बिजली की कमी थी, अब वहां स्वनिर्भर बिजली उत्पादन हो रहा है। उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के बार गांव में रहने वाले रामेश्वर सिंह ने तीन किलोवाट का संयंत्र लगवाया। उनका कहना है, 'पहले बिजली बिल और जनरेटर दोनों की चिंता रहती थी। अब हर महीने बिजली भी है और 2 हजार 500 रुपये की कमाई भी होती है।'