जायस कस्बे में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
जायस। श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को प्रवाचक मुकेश महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि रिश्तों की असली कीमत धन-दौलत से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनापन से तय होती है। सच्ची मित्रता वही है, जिसमें बिना किसी स्वार्थ के एक-दूसरे का सम्मान किया जाए।
प्रवाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बालसखा सुदामा की गरीबी को महत्व नहीं दिया, बल्कि उनके प्रेम और समर्पण को सम्मान दिया। यह सीख देता है कि किसी व्यक्ति का मूल्य उसकी आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके गुणों और भावनाओं से आंका जाना चाहिए।
प्रवाचक ने कहा कि जीवन में अहंकार छोड़कर प्रेम और विनम्रता अपनाने से रिश्ते मजबूत होते हैं। सच्चा मित्र वही होता है, जो कठिन समय में साथ खड़ा रहे और बिना किसी अपेक्षा के मदद करे। मनुष्य को भी दूसरों के प्रति ऐसा ही निस्वार्थ भाव रखना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि जीवन में धन कमाने के साथ अच्छे संबंध बनाना और उन्हें निभाना भी जरूरी है। प्रेम, त्याग और समर्पण से ही रिश्तों में मिठास बनी रहती है। इस मौके पर अशर्फी लाल कौशल, संजय कौशल और विनय कौशल आदि मौजूद रहे।