जलसंरक्षण गोष्ठी को संबोधित करते हुए
अमेठी। जलबिरादरी अमेठी की ओर से रविवार को स्थानीय ब्लाक के गांव ताला महादेवन स्थित श्री मुकुटनाथ मंदिर धाम परिसर में चौमासे के दौरान गिरते भूगर्भ जल स्तर को उठाने को लेकर जल चौपाल आयोजित हुई। इस दौरान चौपाल में सरकार और आम जनता के सहयोग से भविष्य के संकट से बचाव संभव की बात वक्ताओं ने कही।चौपाल में जलबिरादरी अध्यक्ष डॉ अर्जुन पांडेय ने भूगर्भ जल की स्थिति को लेकर चर्चा करते हुए कहा कि तीन दशक पूर्व जिले का औसत भूगर्भ जलस्तर 15-20 फीट रहा, जो आज घटकर 30-40 फीट तक नीचे जा चुका है। सही मायने में प्रमुख मालती एवं उज्जयिनी नदियां नाला बन चुकी हैं। तिलोई, मसियांव मैहार, चंदवा, समदा, बढऩी और बढ़ैला आदि बड़े ताल, जो बचे हैं सूखे पड़े हैं, जहां गादों का जमाव जबरदस्त है। नि:शुल्क बोरिंग, बाटलिंग प्लांट की मार जबरदस्त है। दावा है कि हजारों की संख्या में अमृत सरोवर बने हैं। लेकिन उनकी डिजाइन ऐसी है कि बरसात का पानी जा ही नहीं सकता।
आवश्यकता है कि तकनीकी विशेषज्ञों की राय से सरोवर बनें। इन सरोवरों को पिकनिक स्पॉट न बनाकर तालाब की शक्ल में रखा जाय। गंभीर जलसंकट से उबरने के लिए समाज को पुरानी पीढ़ी की तरह आगे आने की जरूरत है। पूर्व प्रधानाचार्य राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल ने कहा कि ग्राम पंचायत जंगल रामनगर के गांव भूसूपार, सेमरहवा, पूरे परसादी व रणबीर नगर गांवों के लोग दूसरे गांव से पीने का पानी लाते हैं जो चिंता का विषय हैं।
चौपाल में गिरजा शंकर शुक्ल, सत्येन्द्र प्रकाश शुक्ल, कौशल किशोर मिश्र, मनोज कुमार शुक्ल ने भी उभरते जल संकट पर विचार व्यक्त किये। इस मौके पर डॉ अभिमन्यु कुमार पांडेय, विकास शुक्ल, सुरेश शुक्ल,गिरीश कुमार तिवारी,संजय कुमार मिश्र, सतीश कुमार मिश्र, केशव राम, आदि मौजूद रहे।