अमेठी। शहर में पहली बार दशहरा की परंपरा टूट गई। रामलीला नहीं हुई और ना ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के तीर चले। कमेटी के ही लोगों ने रावण के पुतले का दहन किया। करीब 5:30 बजे अच्छाई पर बुराई का प्रतीक रावण धू-धू कर जल उठा। सुबह से ही शहर स्थित रामलीला मैदान खाकी के साए में रहा। मैदान में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा।
कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम के मद्देनजर प्रशासन की ओर से दशहरा पर रामलीला और मेला लगने की अनुमति प्रदान नहीं की गई। जबकि रामलीला कमेटी की ओर से अनुमति मांगी गई थी।
अनुमति नहीं मिलने से इस बार कमेटी व क्षेत्र के लोगों में मायूसी छाई रही। रविवार सुबह से ही पुलिस फोर्स व फायर ब्रिगेड रामलीला मैदान एवं तिराहों चौराहों पर खड़ी दिखी। रविवार शाम करीब 4:45 बजे प्रतीकात्मक रावण दहन की अनुमति प्रदान की गई।
इसके बाद कमेटी के लोगों के साथ व्यापार मंडल के पदाधिकारी रामलीला मैदान पहुंचे। यहां कमेटी व अन्य मौजूद लोगों द्वारा करीब 5:30 बजे रावण के पुतले का दहन किया गया। जबकि प्रतिवर्ष रामलीला समाप्त होने के बाद राम द्वारा तीर चला कर रावण के पुतले का दहन किए जाने की परंपरा रही है।
रामलीला मंचन न होने से रावण के पुतले का दहन कमेटी के लोगों द्वारा किया गया। इस दौरान रामलीला मैदान में सीओ सहित भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रही। रामलीला मैदान के साथ ही शहर की सड़कों पर भी सन्नाटा पसरा दिखाई पड़ा। क्षेत्र के लोग बच्चों के लिए जलेबी व मिट्टी के खिलौने आदि के लिए भटकते रहे। दुकानें न लगने के चलते जलेबी भी लोगों को नहीं मिल पाई।
रामलीला कमेटी के साथ ही क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश दिखाई पड़ा। लोगों का कहना था कि अयोध्या समेत पड़ोसी जिलों में दुर्गा पूजा एवं दशहरा आयोजित हुआ। तमाम राजनीतिक रैलियां भारी भीड़ के साथ हो रही हैं। लेकिन दशहरे पर जिले में किसी भी कार्यक्रम व मेले की अनुमति नहीं दी गई।