मऊ स्थित आवास पर गौरीगंज विधायक को ज्ञापन सौंपते शिक्षक। -संगठन
अमेठी सिटी। कम छात्र संख्या के आधार पर परिषदीय विद्यालयों को एकीकृत करने की प्रक्रिया के विरोध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की अमेठी इकाई ने रविवार को गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह से भेंट कर इस निर्णय के खिलाफ चिंता व्यक्त की। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर कहा कि यह निर्णय न केवल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009 के प्रावधानों के विरुद्ध है, बल्कि ग्रामीण बच्चों के अधिकारों का सीधा हनन है।
जिला संयोजक वैष्णवी नंदन के नेतृत्व में पहुंचे शिक्षकों ने बताया कि विद्यालयों का विलय कर उन्हें दूरदराज क्षेत्रों में स्थानांतरित करने से बालिकाओं और छोटे बच्चों की शिक्षा बाधित होगी। इससे पढ़ाई बीच में छोड़ने वालों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है। संघ ने स्पष्ट किया कि विद्यालयों की स्थापना शिक्षा अधिकार कानून के तहत इस शर्त पर हुई थी कि 300 की जनसंख्या अथवा एक किलोमीटर की परिधि में एक प्राथमिक विद्यालय अनिवार्य हो। वर्तमान में प्रस्तावित विलय नीति इस व्यवस्था को समाप्त कर देगी।
शिक्षक संघ ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि शासनादेश 16 जून 2025 को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही प्रत्येक विद्यालय में छात्र संख्या के अनुसार शिक्षक व प्रधानाध्यापक की तैनाती सुनिश्चित की जाए। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाए और निजी विद्यालयों को मिली संदिग्ध मान्यताओं की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
शिक्षकों ने कहा कि यदि इन मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो यह निर्णय गांव के बच्चों की शिक्षा को संकट में डाल देगा। उन्होंने विधायक से अनुरोध किया कि यह मुद्दा विधानसभा में प्राथमिकता से उठाया जाए। इस अवसर पर राजेश तिवारी, प्रणव कुमार शुक्ल, प्रशाना सिंह, एके यादव, पंकज सिंह और गोपाल स्वरूप त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।