अमेठी सिटी। जिले में बिना पंजीयन तमाम निजी अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। कोई घटना होने पर स्वास्थ्य विभाग के अफसर जांच शुरू करते हैं। ठोस कार्रवाई न होने के कारण अवैध अस्पताल संचालक मनबढ़ हो गए हैं। इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है।
अमेठी कस्बे में आशीर्वाद नर्सिंग होम कुछ इसी तरह संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह नर्सिंग होम वर्ष 2017 में साकेत पाली क्लीनिक नाम से दुर्गापुर मार्ग पर संचालित था। उसी दौरान प्रसव के समय एक महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग होम को सील कर दिया था। इसके बाद संचालन शहर के बाईपास पर शुरू किया गया, लेकिन वहां भी कार्रवाई होने पर नर्सिंग होम को अंतू रोड पर शिफ्ट कर दिया गया। यहीं पर इसे आशीर्वाद नर्सिंग होम के नाम से चलाया जाने लगा।
स्वास्थ्य विभाग ने फरवरी 2021 को विद्याभूषण ओझा के नाम लाइसेंस जारी किया था लेकिन अनियमितताओं के चलते जून 2024 में यह लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। दो अगस्त 2024 को एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद की तहरीर पर विद्याभूषण ओझा के खिलाफ कोतवाली में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी संचालन पूरी तरह बंद नहीं हुआ। बीती 20 जनवरी को संग्रामपुर के पूरे तालुकदार के पुरवा निवासी अजय सिंह की पत्नी वंदना सिंह को प्रसव पीड़ा के बाद आशीर्वाद नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई। इसकी मजिस्ट्रेटी जांच भी कराई गई। सूत्रों की मानें तो बगैर लाइसेंस के इसका संचालन किया जा रहा है।
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि बिना पंजीयन संचालित अस्पतालों व झोलाछापों पर लगातार कार्रवाई की जाती है। बताया कि जो भी दोषी मिलते हैं, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराकर कार्रवाई की जा रही है।
विभाग की ढीली कार्रवाई
अगर कोई मामला बड़ा हो जाता है और सुर्खियों में आता है तो स्वास्थ्य विभाग अपना दामन बचाने के लिए अस्पताल को नोटिस देने संग सील करने की कार्रवाई कर देता है। धीरे-धीरे मामला शांत होने पर झोलाछाप फिर से अस्पताल चलाने लगते हैं। कई संचालक तो विभागीय कर्मियों से मिलीभगत करके दूसरा पंजीकरण करा लेते हैं।
केस एक
अमेठी के भगनपुर छावनी निवासी श्रीराम यादव की पत्नी ऊषा देवी (30) को पांच जून 2025 की शाम प्रसव पीड़ा होने पर अमेठी कस्बे में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऊषा के भाई राजकुमार यादव ने आरोप लगाया था कि बहन की हालत गंभीर थी लेकिन डॉक्टरों ने समय रहते इलाज नहीं किया था, जिससे ऊषा की मौत हो गई थी। परिजनों के विरोध करने पर यहां सक्रिय दलालों ने सुलह समझौता करा दिया था। इस प्रकरण में जांच भी दबा दी गई थी।
केस दो
यह घटना 23 मई 2025 की है। कमरौली में संचालित बिना पंजीयन संचालित अस्पताल में बाजारशुकुल के महोना गांव की प्रसूता की मौत हो गई थी। मृतका के परिजनों ने क्लीनिक प्रबंधन और डॉक्टरों पर उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था। कार्रवाई के नाम पर विभाग की ओर से सिर्फ खानापूर्ति की गई थी।