अमेठी गायत्री मंदिर परिसर में आयोजित अनुष्ठान में शामिल श्रद्धालु। स्रोत : आयोजक
अमेठी। गायत्री शक्तिपीठ में 40 दिवसीय गायत्री महापुरुश्चरण साधना के 33वें दिन सोमवार को प्रात:कालीन पूजन के दौरान परिव्राजक इंद्रदेव शर्मा ने साधकों को संयम, स्वाध्याय, साधना और सेवा के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आत्मबोध और तत्वबोध की साधना के साथ इन चारों को दैनिक जीवन में अपनाने से व्यक्ति के व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आता है।
उन्होंने कहा कि इंद्रिय, समय, अर्थ और विचार का संयम आध्यात्मिक और भौतिक उन्नति के लिए जरूरी है। इंद्रिय संयम के अभाव में व्यक्ति की ऊर्जा अनावश्यक कार्यों में खर्च होती है। समय का संयम न होने से दिनचर्या प्रभावित होती है, वहीं अर्थ के असंयम से जीवन भोग-विलास की ओर बढ़ता है। विचारों में संयम न होने से चिंता और तनाव बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि स्व-अनुशासन और नियमित साधना से गायत्री उपासना में एकाग्रता आती है। इससे सेवा-आराधना के लिए भी मजबूत आधार तैयार होता है। सेवा की भावना व्यक्ति के आत्मकल्याण के साथ समाज हित में योगदान का मार्ग प्रशस्त करती है।
इस अवसर पर अशोक कुमार बरनवाल, शारदा प्रसाद शुक्ला, रामतीरथ तिवारी, अभिनव प्रताप सिंह, रमाकांत मिश्रा, सुभाष चंद्र द्विवेदी, सुशील कुमार श्रीवास्तव, कुसुम शर्मा, शीला जायसवाल, सरिता सिंह, राणा प्रताप सिंह, शंकर लाल और रामबहादुर आदि मौजूद रहे।