बाजारशुकुल के सत्थिन चौराहे के समीप गिरा ट्रांसफार्मर। -संवाद
अमेठी सिटी। आंधी और बारिश के आठ दिन बाद भी जिले के सैकड़ों गांवों में बिजली व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट सकी है। जगदीशपुर, तिलोई, बाजारशुकुल और गौरीगंज क्षेत्र के 315 पुरवों में अब भी बिजल गुल है। इससे करीब दो लाख लोगों के सामने पेयजल, सिंचाई और रोजमर्रा के कामकाज का संकट खड़ा हो गया है।
बिजली न होने से इन्वर्टर डिस्चार्ज हो चुके हैं। लोगों को मोबाइल चार्ज करने के लिए दूसरे गांवों और बाजारों का सहारा लेना पड़ रहा है। नलकूप बंद होने से पानी की किल्लत बढ़ गई है। छोटे कारखाने, मिल और फ्रीजर आधारित कारोबार भी प्रभावित हैं। मिठाई और खाद्य सामग्री खराब होने लगी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर टूटे खंभे और तार अब भी नहीं बदले गए हैं। भाकियू टिकैत गुट के जिलाध्यक्ष नफीस चंदेल ने बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने की मांग की है। ऊर्जा निगम अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत कार्य तेजी से कराया जा रहा है।
बाजारशुकुल के सत्थिन उपकेंद्र से जुड़े करीब 150 गांवों में आठ दिन बाद भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। आपूर्ति ठप होने से करीब एक लाख की आबादी प्रभावित है। 350 नलकूप बंद होने से पेयजल और सिंचाई का संकट गहरा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई जगह टूटे खंभे और तार अब भी पड़े हैं।
तिलोई के 175 पुरवों में अब भी अंधेरा
तिलोई। आंधी के बाद तिलोई उपकेंद्र से जुड़े 175 पुरवों में अब तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। ऊर्जा निगम के कर्मचारी मरम्मत कार्य में जुटे हैं। अधिशासी अभियंता राकेश रोशन ने बताया कि 90 फीसदी गांवों में बिजली पहुंचा दी गई है। शेष गांवों में अगले दो दिन में आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
गर्मी में बिजली संकट से बढ़ी परेशानी
जगदीशपुर। उपकेंद्र से जुड़े खैरातपुर, बगमीरा, जाफरगंज, मधूपुर और मंगौली समेत 35 गांवों में बिजली आपूर्ति अब भी बाधित है। गर्मी में लोग हवा और पानी के लिए परेशान हैं। पेयजल के लिए ग्रामीण हैंडपंप और अन्य साधनों पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात में अंधेरे और उमस के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है।