अमेठी सिटी। मुंशीगंज के मडेरिका-सरुवांवा निवासी गंगाप्रकाश सिंह की बहन विमलेश सिंह की हत्या के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुल्तानपुर की अदालत ने तीन संदिग्धों के पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की अनुमति दे दी है। अदालत ने विवेचक और संदिग्धों की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।
गंगाप्रकाश सिंह ने बंधुआकला, सुल्तानपुर थाने में नौ मई को बहन विमलेश सिंह की गला काटकर हत्या किए जाने के संबंध में अज्ञात लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के दौरान मृतका के पति चंद्रशेखर सिंह के बयान में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। उन्होंने बताया कि घर में मजदूरी का कार्य समरभीम उर्फ लालू कोरी करता था। वहीं दूध डेयरी भेजने के मुद्दे पर अजय कोरी और विमलेश सिंह के बीच विवाद हुआ था। इसके अलावा देवलपुर निवासी राज बहादुर सिंह से ब्याज पर दी गई धनराशि को लेकर भी मतभेद की जानकारी मिली।
इन तथ्यों के आधार पर विवेचक प्रमोद कुमार पटेल ने तीनों संदिग्धों का पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने की अनुमति मांगी थी। वहीं तीनों संदिग्धों ने भी अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच में सहयोग की इच्छा जताई और परीक्षण के लिए सहमति दी।
सीजेएम नवनीत सिंह की अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सशर्त अनुमति दी है। आदेश में परीक्षण के दौरान प्राप्त तथ्यों और बयानों को विवेचना का हिस्सा बनाने की बात कही गई है। अब पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर परीक्षण कराएगी।